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Faridabad News: अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने पीएम और शिक्षा मंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

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संवाद न्यूज एजेंसी
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फरीदाबाद। जिले के अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (विद्यालय शिक्षा) ने बृहस्पतिवार को जिला उपायुक्त कार्यालय के माध्यम से प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। इसमें वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त करने और उनके सेवा-अधिकारों की रक्षा के लिए विधायी हस्तक्षेप की मांग की गई है।

महासंघ के अनुसार, 23 अगस्त 2010 को एनसीटीई द्वारा जारी टीईटी अधिसूचना और हाल ही में 29 मई 2026 को आए सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद देशभर के लाखों पुराने शिक्षकों के भविष्य पर संकट मंडराने लगा है। शिक्षकों में असुरक्षा और असमंजस की भावना पैदा हो गई है। संगठन का तर्क है कि किसी भी नियम या पात्रता मानदंड को पूर्व प्रभाव से लागू करना प्राकृतिक न्याय, समानता और विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के पूरी तरह खिलाफ है।
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महासंघ ने कहा कि 2010 से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों की भर्तियां उस समय के वैध नियमों और चयन प्रक्रियाओं के तहत ही हुई थीं। इन शिक्षकों ने दशकों तक राष्ट्र निर्माण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और चरित्र निर्माण में अपना योगदान दिया है। ऐसे में करियर के इस मोड़ पर उन पर नए पात्रता मानक थोपना बिल्कुल सही नहीं है।
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संसद से विधायी संशोधन की मांग

ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार से मांग की गई है कि इन शिक्षकों के सेवा-अधिकार, वरिष्ठता, पदोन्नति और अन्य वैधानिक लाभों का पूर्ण संरक्षण किया जाए। यदि आवश्यकता पड़े, तो सरकार संसद में आवश्यक विधायी संशोधन या विशेष प्रावधान लाकर इस वर्ग को स्थायी राहत प्रदान करे। महासंघ ने उम्मीद जताई है कि सरकार शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द ही न्यायपूर्ण निर्णय लेगी। इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष रामवीर शर्मा, कोषाध्यक्ष पुरुषोत्तम भारद्वाज , जिला अध्यक्ष देवेंद्र गौड़, जिला सचिव महेंद्र कुमार, जयवीर भाटी, संदीप दीक्षित, जयप्रकाश, नंदकिशोर सहित अन्य अध्यापक उपस्थित रहे।
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