लूट व झपटमारी के दो मामलों में बचाव पक्ष ने उजागर की खामियां तो बरी हो गए आरोपी
सोनू यादव
फरीदाबाद। केस की जांच के दौरान तकनीकी खामियों के चलते पकड़े गए आरोपी अदालत में दोषी साबित नहीं हो पा रहे हैं। बीते दस दिन के भीतर मोबाइल झपटमारी व शादी का झांसा देकर दुष्कर्म के दो मामलों में तीन आरोपी इन्हीं खामियों के चलते अदालत से बरी हो गए। अभियोजन पक्ष की ओर से अपने केस को मजबूत बताने के लिए सबूत, गवाह पेश करते हुए दलीलें दी गईं। वहीं बचाव पक्ष ने पुलिस की जांच में बरती गई खामियों को उजागर किया और अपने मुवक्किलों को बरी करा लिया।
पहला मामला
शादी का झांसा देकर दुष्कर्म की एफआईआर सेक्टर-58 थाने में आठ जनवरी 2022 को दर्ज हुई थी। एक महिला ने आरोप लगाया कि प्रेमी ने उसे शादी का झांसा देकर दुष्कर्म किया, काफी समय साथ रहा और बगैर बताए भाग गया। पुलिस ने कार्रवाई कर आरोपी को गिरफ्तार किया और जेल भेज चालान पेश कर दिया। लेकिन ट्रायल में सामने आया कि आरोपी युवक ने तो अपना धर्म बदलकर हिंदू धर्म अपनाया और इनके दो बच्चे भी हैं। आरोपी के वकील ने आर्य समाज मंदिर से जारी विवाह प्रमाण पत्र व दो बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र भी दिखाए। इसके साथ ही ये भी आरोप लगाया कि महिला पहले से विवाहिता थी और तलाक लिए बगैर ही कोई उसे शादी का झांसा देकर दुष्कर्म कैसे कर सकता है। तलाक लिए बगैर ही महिला ने इस आरोपी से आर्य समाज मंदिर में शादी भी कर ली। बीते सप्ताह अदालत ने सभी पक्षों को सुनकर आरोपी युवक को बरी कर दिया।
दूसरा मामला
सेक्टर-58 थाने में बाइक सवार दो बदमाशों द्वारा राहगीर जाहिद से मोबाइल छीनने की एफआईआर छह अप्रैल 2023 को दर्ज की गई। जाहिद ने बताया कि छह अप्रैल 2023 की रात लगभग साढ़े आठ बजे उससे मोबाइल छीना गया। पुलिस ने जांच करते हुए दो आरोपियों धौज इलाके निवासी अरबाज को सात अप्रैल व आरिफ को 12 अप्रैल 2023 को गिरफ्तार कर इनके खिलाफ चालान अदालत में पेश किया। वहीं बचाव पक्ष ने मामला उठाया कि वारदात के तुरंत बाद 6 अप्रैल 2023 को पुलिस टीम ने मौके पर जाकर रफ साइट प्लान बनाया। हैरत की बात ये है कि उसी प्लान के ऊपर पुलिस ने दोनों आरोपियों अरबाज व आरिफ के नाम, पते आदि पूरी डिटेल लिखी हुई थी। जबकि दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी सात व 12 अप्रैल 2023 की बताई गई। शिकायतकर्ता के मोबाइल का कोई बिल भी अदालत में पेश नहीं किया गया। मोबाइल की सिम या आईईएमआई के आधार पर कोई सीडीआर भी इकट्ठा नहीं की गई। आरोपी से बरामद होने वाला मोबाइल भी शिकायतकर्ता को पहचान के लिए कभी दिखाया नहीं गया।