साइबर ठगों ने कंपनी की ईमेल आईडी हैक कर ग्राहक कंपनी को भेजा अपना खाता, ट्रांसफर कराए 79.33 लाख
शहर में सात अन्य लोगों से भी हुई ठगी, संबंधित थानों में प्राथमिकी
नंबर गेम- 18 दिनों में की गई ठगी
10 से अधिक किश्तों में ट्रांसफर हुई राशि
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। शहर में साइबर ठगों ने आठ लोगों से 1.01 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। साइबर जालसाजों ने ईमेल हैक, फर्जी निवेश, एपीके फाइल, टेलीग्राम टास्क, क्रेडिट कार्ड और लोन खाते खोलने समेत अलग-अलग तरीकों से सेवा का झांसा देकर विश्वास बेचा और खाते खाली किए। पुलिस प्रवक्ता यशपाल ने बताया कि अलग-अलग साइबर थानों में 21 और 22 सितंबर को मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस संदिग्ध बैंक खातों की जांच कर रही है।
पहले मामले में साइबर ठगों ने कंपनी की ईमेल आईडी हैक किया। इसके बाद ग्राहक कंपनी को मेल भेजकर भुगतान के लिए उपयोग होने वाले खाते को बदलकर अपना खाता दे दिया। इसके बाद आरोपियों ने 79,33,168 रुपये ट्रांसफर करवा लिए। यह रकम 18 दिनों में 10 से अधिक किश्तों में ट्रांसफर कराई गई।
सेक्टर-7ई निवासी सुनील खडूजा ने पुलिस को बताया कि उनकी कंपनी ऑटोमोबाइल पार्ट्स बनाकर कंपनियों को सप्लाई करती है। भुगतान ऑनलाइन बैंक खाते में लिया जाता है। आरोप है कि साइबर ठगों ने कंपनी की ईमेल आईडी हैक कर ग्राहक कंपनी को फर्जी मेल भेजे। मेल में दावा किया गया कि कंपनी ने वित्तीय कारणों से अपना बैंक खाता बदल लिया है। साथ में नए बैंक खाते का फर्जी कैंसिल चेक भी भेजा गया।
शिकायत के अनुसार, ग्राहक कंपनी ने फर्जी मेल को असली मानकर 3 सितंबर से 21 सितंबर 2026 के बीच अलग-अलग आपूर्ति बिलों की रकम नए बैंक खाते में भेजनी शुरू कर दी। 18 दिनों में 10 से अधिक बार आरटीजीएस और एनईएफटी के जरिये कुल 79,33,168 रुपये ट्रांसफर किए गए। रकम अलग-अलग बिलों के भुगतान के रूप में जा रही थी, इसलिए तत्काल किसी को शक नहीं हुआ।
पुराने खाते में पैसे नहीं आने पर हुआ खुलासा
सुनील खडूजा के अनुसार, 21 सितंबर तक उनकी कंपनी के पुराने बैंक खाते में नियमित भुगतान नहीं पहुंचा। इस पर उन्होंने ग्राहक कंपनी से संपर्क किया। वहां पता चला कि भुगतान नए बैंक खाते में किया जा चुका है। इसके बाद कंपनी की ईमेल आईडी की जांच कराई गई। जांच में पता चला कि ईमेल हैक करने के बाद ठगों ने ग्राहक को भेजे गए मेल और बैंक खाते से संबंधित संदेश सेंट आइटम से हटा दिए थे। इसका उद्देश्य कंपनी संचालक को तुरंत ठगी की जानकारी होने से रोकना बताया गया है।
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दूसरे मामले में श्रवण कुमार पोरवाल से 20 जून से 29 अगस्त के बीच फेसबुक और व्हाट्सएप के जरिये फर्जी ट्रेडिंग पोर्टल पर निवेश कराया गया। 9,53,350 रुपये लेने के बाद रकम निकालने के लिए अतिरिक्त शुल्क मांगा गया। तीसरे मामले में मनोज कुमार से 11 से 19 सितंबर के बीच लिफ्ट के पार्ट्स देने के नाम पर बैंक खाते और नकद के जरिये 1.50 लाख रुपये लिए गए, लेकिन सामान नहीं भेजा गया। चौथे मामले में शीतल कुमारी को 11 से 26 अगस्त के बीच ऑनलाइन टास्क कराया गया। रकम निकालने पर खाता फ्रीज होने की बात कहकर कुल 3,44,520 रुपये जमा करा लिए गए। पांचवें मामले में 19 सितंबर को आशा माथुर का मोबाइल एक एप डाउनलोड होने के बाद हैंग हो गया। 19 और 21 सितंबर को बैंक खातों से कुल 1.59 लाख रुपये निकल गए। छठे मामले में पायल से 17 सितंबर को गूगल पर मिले फर्जी कस्टमर केयर नंबर के जरिये संपर्क कर केवाईसी के नाम पर एपीके फाइल खुलवाई गई। इसके बाद 97 हजार रुपये निकल गए। सातवें मामले में अनिल कपूर से 21 सितंबर को क्रेडिट कार्ड बनवाने के नाम पर एपीके फाइल खुलवाकर चार कार्ड की जानकारी ली गई। इसके बाद 4,49,014 रुपये कट गए। आठवें मामले में अदिती उपाध्याय को जून में सिबिल जांचने पर अपने नाम दो लोन खाते होने की जानकारी मिली। एक जुलाई को ईएमआई संदेश आने के बाद जांच में ऑनलाइन खरीदारी के लिए 2 फोन मंगाए जाने का पता चला। इस मामले में करीब 50,953 रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है।