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Faridabad News: जलभराव से निपटने के लिए तकनीक आधारित रणनीति तैयार

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जहां ढलान से निकासी नहीं वहां नए निकास बिंदु, सीवर और वर्षा जल लाइनों को अलग रखने पर जोर
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। आगामी मानसून को देखते हुए फरीदाबाद में इस बार जलभराव से निपटने के लिए प्रशासन ने पूरी तरह तकनीक आधारित रणनीति तैयार की है। हर साल बारिश के दौरान सड़कों और कॉलोनियों में जमा होने वाले पानी की समस्या को खत्म करने के लिए अब पारंपरिक तरीकों के बजाय वैज्ञानिक व्यवस्था अपनाई जाएगी। खासतौर पर न्यूनतम दबाव गणना और कई निकासी बिंदु बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि भारी बारिश के दौरान भी पानी का तेजी से निस्तारण हो सके।

जल निकासी को प्रभावी बनाने के लिए न्यूनतम दबाव गणना को आधार बनाया गया है। इस प्रक्रिया के जरिये यह तय किया जाएगा कि पंपिंग व्यवस्था को कितनी क्षमता और दबाव की आवश्यकता है, ताकि पानी को निचले स्थान से उठाकर सही दिशा में पहुंचाया जा सके। इससे पंपिंग व्यवस्था अधिक सटीक और प्रभावी बनेगी। प्रशासन का मानना है कि इस वैज्ञानिक तरीके से न केवल जलभराव की समस्या कम होगी, बल्कि पूरी व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव भी नहीं पड़ेगा।
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जहां ढलान से निकासी संभव नहीं, वहां बनेंगे नए निकास बिंदु
शहर के कई हिस्सों में केवल ढलान के सहारे पानी की निकासी संभव नहीं हो पाती, जिससे पानी जमा हो जाता है। ऐसे इलाकों में अब एक ही पंप पर निर्भर रहने के बजाय कई निकासी बिंदु बनाए जाएंगे। इसके तहत अलग-अलग स्थानों पर नए निकास बिंदु विकसित किए जाएंगे, ताकि पानी का बहाव एक जगह केंद्रित न होकर कई दिशाओं में बंट सके और निकासी तेज हो।

सीवर और वर्षा जल लाइनों को अलग रखने पर जोर
जलभराव की एक बड़ी वजह सीवर और बारिश के पानी का आपस में मिलना भी है। इसे रोकने के लिए अब सीवर लाइन और वर्षा जल निकासी लाइन को अलग रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे न केवल निकासी व्यवस्था की क्षमता बेहतर होगी, बल्कि गंदगी फैलने और ओवरफ्लो की समस्या भी कम होगी।

खुले मैनहोल पर जालियां होंगी अनिवार्य
मानसून के दौरान खुले मैनहोल हादसों का बड़ा कारण बनते हैं। इसको देखते हुए सभी खुले मैनहोल और जल निकासी बिंदुओं पर जालियां लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इससे जहां एक ओर दुर्घटनाओं पर रोक लगेगी, वहीं कचरा सीधे सीवर में जाने से भी रोका जा सकेगा, जिससे रुकावट की समस्या कम होगी। फरीदाबाद में इस बार जलभराव से निपटने के लिए अपनाई जा रही यह वैज्ञानिक और बहु-स्तरीय रणनीति शहरवासियों को राहत देने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
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संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां पहले से ही तैयारी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि मानसून आने से पहले ही जलभराव की समस्या का प्रभावी समाधान हो सके।-डीसी आयुष सिन्हा
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