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स्वामित्व योजना: 476 पात्रों को अभी भी संपत्ति नाम होने का इंतजार

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स्वामित्व योजना: 476 पात्रों को अभी भी संपत्ति नाम होने का इंतजार
- योजना के तहत 1491 लोगों ने किया था ऑनलाइन आवेदन, मामले में निगम के संयुक्त आयुक्त हो चुके निलंबित
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। मुख्यमंत्री ने नगर निगम के संयुक्त आयुक्त गौरव अंतिल को निलंबित कर लोगों के कार्याें में देरी करने वाले अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया है। संयुक्त आयुक्त पर हुई कार्रवाई बृहस्पतिवार को नगर निगम में चर्चा का विषय बनी रही। हालांकि स्वामित्व योजना के तहत 1491 लोगों ने ऑनलाइन आवेदन किया था। इसमें से करीब 617 आवेदन सही मिले हैं। इसमें से करीब 150 लोगों को दुकानों की रजिस्ट्री हो चुकी है। 476 पात्रों को अभी भी संपत्ति अपने नाम होने का इंतजार है।
शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने जनवरी 2021 में एक अधिसूचना जारी की थी। जिसमें 20 साल से अधिक पट्टे/ किराये की संपत्तियों के लोगों को आवेदन कर जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी थी। निगम क्षेत्र में 1757 संपत्तियां लीज पर है। पहले चरण में 175 व्यक्तियों ने निगम में सरकार की हिदायतों के अनुसार आवेदन किया था। इसमें जिसके कागजात सही मिले,उन्हें दुकानों का मालिकाना हक मिला। दुकानदारों की मांग पर सरकार ने पिछले साल जुलाई में दोबारा ऑनलाइन आवेदन मांगा था। चार जुलाई से 30 सितंबर करीब 1491 लोगों ने ऑनलाइन आवेदन किया था। इसमें से करीब 617 के आवेदन सही मिले हैं। उन्हें मालिकाना हक देने के लिए काम चल रहा है। इसमें करीब 150 लोगों को दुकानों की रजिस्ट्री हो चुकी है। सरकार स्वामित्व योजना को लेकर गंभीर है।
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निगम सूत्रों के अनुसार बुधवार देर शाम को चंडीगढ़ से सभी पात्र और अपात्रों के नाम और मोबाइल नंबर मांगे गए थे। इसमें कई आवेदकों के नाम पर मोबाइल नंबर नगर निगम देर शाम तक चंडीगढ़ मुख्यालय नहीं भेज पाया। माना जा रहा है कि इस बात को सीएम के सामने अधिकारियों से रख होगा। जिसके बाद नगर निगम में संयुक्त आयुक्त और निगम में अतिरिक्त आयुक्त का काम देख रहे गौरव अंतिल को देर रात निलंबित कर दिया गया। गौरव स्वामित्व योजना के नोडल अधिकारी थे।

देश के विभाजन के बाद आए लोगों को दी गई थीं दुकानें
देश के विभाजन के बाद आए लोगों को एनआईटी क्षेत्र में बसाया गया था और कई को बाद में दुकानें अलॉट की गई थी। हरियाणा व्यापार मंडल के जिला प्रधान राम जुनेजा ने बताया कि करीब 45 साल पहले लोगों को दुकानों दी गई थी। उनका कहना है कि पहले अधिकारियों ने देखकर ही दुकान बनाकर दी थी। उन्होंने बताया कि ओल्ड प्रेस कॉलोनी, ईस्ट इंडिया कॉटन मिल, तिकोना पार्क बाजार, केसी रोड, बाटा पुल रोड व नीलम पुल रोड की दोनों ओर की दुकानें करीब 45 साल बनी थी। जुनेजा का कहना इन दुकानों की फाइलों को प्लानिंग विभाग ने रुकावट डाली और फाइलें रिजेक्ट हो गई।
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657 आवेदन रद्द, दुकानदार परेशान

नगर निगम ने मिले आवेदनों को जांच कराया। इसमें करीब 657 आवेदनों को रद्द कर दिया गया है। इन लोगों की दुकानें सड़कों के दायरे में आ रही है। वहीं, कुछेक ने अपनी दुकानें दूसरे को बेच दी हैं। जबकि, कुछेक ने दुकानों का विस्तार कर लिया है। इसके अलावा कुछेक लोगों के पास जरूरी कागजात नहीं हैं। ऐेसे में इन फाइलों को निगम ने रिजेक्ट कर दिया है।
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कार्रवाई बनी चर्चा का विषय
नगर निगम के एक क्षेत्रीय कराधान अधिकारी ने बताया कि फरीदाबाद नगर निगम स्वामित्व योजना में प्रदेश में दूसरे स्थान पर है। आवेदनों के अनुसार कई की फाइलों को पास किया गया है। ऐसे में संयुक्त आयुक्त व नोडल अधिकारी पर कार्रवाई होना नगर निगम में चर्चा का विषय बना रहा। इसके लिए कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
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निगम रहता है सुर्खियों
नगर निगम लगातार प्रदेश में अपनी कार्य शैली के कारण सुर्खियों में रहता है। इससे पहले बिना काम कराए 200 करोड़ घोटाले में दो मुख्य अभियंता समेत अन्य पर कार्रवाई हुई थी। इसमें दो मुख्य अभियंता व ठेकेदार समेत अन्य गिरफ्तार भी हुए थे। इस मामले में तीन आईएएस जांच के दायरे में हैं। इसके अलावा हाल में भ्रष्टाचार मामले में एक आईएएस अधिकारी को एंटी करप्शन ब्यूरो ने गिरफ्तार किया था।
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