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Faridabad News: देसी-विदेशी पर्यटकों की पसंद बनता सूरजकुंड मेला

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नीरज धर पाण्डेय
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फरीदाबाद। एक समय था जब भारत में पर्यटन का अर्थ ज्यादातर धार्मिक यात्राओं या समुद्र तटों की सैर तक सीमित माना जाता था। परिवार तीर्थस्थलों के लिए बचत करते थे और विदेशी पर्यटक ताजमहल, राजस्थान के किलों या गोल्डन ट्रायंगल सर्किट तक ही अपनी यात्रा सीमित रखते थे।
परंतु बदलते दौर में पर्यटन की परिभाषा विस्तृत हुई है और सांस्कृतिक आयोजनों ने भी वैश्विक नक्शे पर अपनी पहचान बनाई है। इसी परिवर्तन की झलक सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में साफ दिखाई दे रही है, जो विदेशी सैलानियों के साथ-साथ देशी पर्यटकों को भी आकर्षित कर रहा है। मेला परिसर इन दिनों सांस्कृतिक विविधता का जीवंत केंद्र बना हुआ है। विभिन्न देशों के कलाकार, पारंपरिक प्रस्तुतियां और हस्तशिल्प विदेशी पर्यटकों को भारतीय लोकजीवन के निकट ला रहे हैं। वहीं भारत के अलग-अलग राज्यों के स्टॉल स्थानीय आगंतुकों को अपनी ही सांस्कृतिक धरोहर से नए रूप में परिचित करा रहे हैं। विदेशी सैलानी यहां भारतीय पहनावे, लोककला और भोजन संस्कृति को अनुभवात्मक रूप से समझने का अवसर पा रहे हैं, जबकि आसपास के शहरों और राज्यों से आए लोग इसे मनोरंजन और सीख दोनों का माध्यम मान रहे हैं।
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पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन देश के पर्यटन परिदृश्य को नई दिशा दे रहे हैं। सूरजकुंड मेला केवल हस्तशिल्प प्रदर्शनी भर नहीं रहा, बल्कि यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान का मंच बनकर उभरा है। यहां महाराष्ट्र के स्ट्रीट फूड से लेकर उत्तर-पूर्वी राज्यों के व्यंजन तक पर्यटकों को देश की विविधता का स्वाद दे रहे हैं। यही बहुआयामी अनुभव विदेशी यात्रियों को पारंपरिक स्मारक यात्राओं से आगे बढ़कर भारत के जीवंत सांस्कृतिक आयोजनों की ओर आकर्षित कर रहा है।
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स्थानीय स्तर पर भी इसका आर्थिक और सामाजिक प्रभाव स्पष्ट है। होटल, परिवहन और छोटे व्यवसायों में गतिविधि बढ़ने से घरेलू पर्यटन को बल मिल रहा है। इस प्रकार सूरजकुंड मेला आधुनिक भारत के विस्तृत पर्यटन परिदृश्य का प्रतीक बनकर उभर रहा है, जहां वैश्विक आकर्षण और स्थानीय सहभागिता साथ-साथ आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
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