सात साल तक की सजा वाले अपराध में गिरफ्तारी से पहले सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सात साल तक की सजा वाले आपराधिक मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारी से पहले सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार की अदालत ने भूपानी थाने में दर्ज एक मामले की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की हैं। अदालत ने मामले की आरोपी महिला को अंतरिम अग्रिम जमानत प्रदान करते हुए जांच अधिकारी को सुप्रीम कोर्ट के अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य मामले के निर्देशों का पालन करने के आदेश दिए हैं।
प्राथमिकी के अनुसार, भूपानी थाना क्षेत्र के राजा शिकायतकर्ता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 10 सितंबर 2026 को आरोपियों ने उनके घर में घुसकर फरसा, कुल्हाड़ी और लोहे की रॉड से हमला किया था। इस शिकायत पर पुलिस ने 20 सितंबर 2026 को आरोपी इंद्रा उर्फ गिंदा व अन्य के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।
आरोपी इंद्रा ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि आरोपी महिला का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और मामले की अधिकांश धाराएं जमानती हैं।
अदालत ने आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि इस मामले में अधिकतम सजा सात वर्ष से कम या सात वर्ष तक है। ऐसे मामलों में पुलिस के लिए सुप्रीम कोर्ट के अर्नेश कुमार केस के दिशानिर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। अदालत ने आरोपी महिला को जांच में शामिल होने के निर्देश के साथ अंतरिम अग्रिम जमानत दे दी।
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सचिन कुमार