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प्राथमिक स्कूल विद्यार्थियों को नहीं भायी...शिकायत में छिपा है तनाव

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फरीदाबाद (मूर्ति दलाल)। पाठ्यक्रम जारी रखने के लिए ऑनलाइन पढ़ाई बेहतर विकल्प बन गया है। इसके बावजूद कुछ बच्चे इसकी आलोचना भी कर रहे हैं। विशेष रूप से प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले नौनिहालों को ये पढ़ाई नहीं भा रही है। इस नई शिक्षा प्रणाली से उनमें तनाव भी देखने को मिल रहा है। वे अपने तरीके से शिकायत व समस्याएं अध्यापकों से साझा कर रहे हैं।
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विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की इन समस्याओं पर समय रहते ध्यान दिया जाए तो काफी हद तक हल निकाला जा सकता है। एतमादपुर स्थित राजकीय स्कूल के हेडमास्टर चतर सिंह ने बताया कि उनसे बच्चों ने कई स्तर पर ऑनलाइन शिक्षा व उससे संबंधित तनाव के बारे में शिकायत की। यह शिकायतें काफी हद तक सही भी थीं। ऐसे में वह अपने अध्यापकों की टीम के साथ प्रत्येक रविवार को अभिभावकों व बच्चों से मिल रहे हैं और उनकी समस्या का समाधान करने की पूरी कोशिश करते हैं।
नौनिहालों की यह समस्याएं हैं तनाव का कारण
- ऑनलाइन माध्यमों से भेजे जाने वाले लिंक का इस्तेमाल न करने आना (कारण, बच्चों को सिखाया ही नहीं गया) द्भ- स्मार्ट फोन का अभाव, ऑनलाइन पढ़ाई के लिए घरों में माहौल की भी कमी
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- बच्चों में इनपुट-आउटपुट के अनुपात में सामंजस्य बनाने की परेशानी
- मोबाइल इस्तेमाल करते वक्त ध्यान भटकने की समस्या
- ऑनलाइन पढ़ाई समझ आने में परेशानी, अभिभावकों को भी जानकारी का अभाव
- दूसरे बच्चों के आगे निकलने व स्वयं पीछे छूटने का भय
- शैक्षणिक वर्ष खराब होने से बचाने के लिए अभिभावकों का दबाव
बच्चे बोले
- एतमादपुर गांव में रहने वाली तीसरी कक्षा की छात्रा प्रीति के अभिभावक उसे फोन देने से कतराते हैं। वह कहते हैं कि बच्ची फोन पर गेम व एप डाउनलोड करती है। फोन फ्रेंडली होने के बाद उसका पढ़ाई से ध्यान भटक गया है। प्रीति कम समय के लिए फोन मिलने से परेशान है।
- कुमुद के पिता मोहम्मद उमर के पास कभी स्मार्ट फोन नहीं था, लेकिन ऑडियो कॉल पर अध्यापकों की मदद से वह पढ़ाई कर रही थी। किताब का पेज नंबर व हल देखने पर भी कई चीजें समझ नहीं आ रहीं। इस कारण वह कई दिनों से परेशान है।
- एतमादपुर विद्यालय की तीसरी कक्षा में पढ़ने वाली एक छात्रा ऐसी है कि उसके घर में कोई फर्नीचर नहीं है। सर्दियों में भी परिवार चटाई पर ही लेटता है। ऐसे में स्मार्ट फोन की दरकार ही उसे परेशान कर रही है।
- छात्रा आशा की समस्या ये है कि ऑनलाइन पढ़ते समय कई बार पाठ्यक्रम समझ नहीं आता, बाद में माता-पिता से भी सवाल हल नहीं करा सकती। कारण, ग्रामीण अभिभावकों को इसकी बिलकुल भी जानकारी नहीं, स्मार्ट फोन तो दूर की बात है।
ऐसे करें निदान
एशियन अस्पताल के बाल रोग व मनोविशेषज्ञ डॉ. विजय ने समस्या के अनुसार तनाव को कम करने के कुछ उपाय बताए हैं। बताते हैं कि कोरोना से अभिभावकों में डर है। तनाव का असर बच्चों पर पड़ रहा है। शारीरिक गतिविधियां कम होने से बच्चे के शारीरिक विकास पर असर पड़ रहा है। किशोर छोटी-छोटी बातों में शर्मिंदगी महसूस करते हैं। इसलिए उनकी बात को अहमियत दें।
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल में मेंटल हेल्थ एंड बिहेवियरल साइंसेंज कंसलटेंट डॉ. राहुल चंढोक कहते हैं कि ऑनलाइन शिक्षा सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रही है। विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध शहरी आबादी की तकनीकी डिवाइस तक पहुंच सीमित है। इसलिए, महामारी के मौजूदा हालातों में इन क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों के छात्र पढ़ाई में पिछड़ने लगे हैं। ऑनलाइन शिक्षा की वजह से बच्चे अपने सहपाठियों के साथ मिलजुल भी नहीं पा रहे हैं। ऐसे में मानसिक स्तर पर उनका अलगाव बढ़ रहा है, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है।
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