बीए, बीसीए, बीबीए और बीकॉम में दो साल से नहीं बच रही एक भी सीट
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिले में उच्च शिक्षा के लिए करीब 7000 यूजी और पीजी सीटें उपलब्ध हैं। इसके बावजूद विद्यार्थियों को मनचाहे पाठ्यक्रम में दाखिला लेने के लिए दिल्ली, रोहतक समेत दूसरे जिलों का रुख करना पड़ रहा है। इसकी मुख्य वजह सामान्य स्नातक पाठ्यक्रमों में सीटों की उपलब्धता और विद्यार्थियों की मांग के बीच अंतर होना है। जिला उच्चतर शिक्षा अधिकारियों के अनुसार, पिछले दो वर्षों से बीए, बीसीए, बीबीए और बीकॉम जैसे पाठ्यक्रमों में एक भी सीट खाली नहीं बच रही है।
जिले में आठ सरकारी कॉलेज हैं, जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई करते हैं। हालांकि, दाखिला प्रक्रिया के दौरान सामान्य पाठ्यक्रमों की सीटें भर जाने के बाद विद्यार्थियों के पास विकल्प सीमित रह जाते हैं। जो सीटें खाली बचती हैं, उनमें पीजी के कई इवनिंग कोर्स और यूजी की विभिन्न श्रेणियों की कोटा सीटें शामिल हैं।
जिले में जेसी बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय भी है, लेकिन यहां मुख्य रूप से तकनीकी और विज्ञान से जुड़े पाठ्यक्रम संचालित होते हैं। ऐसे में सामान्य स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए इस विश्वविद्यालय में विकल्प सीमित हैं।
विश्वविद्यालय की मांग को लेकर हो चुके हैं प्रदर्शन
फरीदाबाद में विश्वविद्यालय स्थापित करने की मांग नई नहीं है। अगस्त 2015 में एनएसयूआई के पदाधिकारियों ने एमडीयू का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने की मांग को लेकर पंडित जवाहरलाल नेहरू कॉलेज के बाहर प्रदर्शन किया था। इसी दौरान एबीवीपी ने भी जिले में पूर्ण विश्वविद्यालय स्थापित करने की मांग उठाई थी। विद्यार्थियों की मांग थी कि स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध हों, ताकि उन्हें पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर न रहना पड़े।
बातचीत
सामान्य पाठ्यक्रमों में सीटें जल्दी भर जाती हैं। पसंदीदा विषय नहीं मिलने पर हमें दूसरे शहरों के कॉलेजों में दाखिला का विकल्प तलाशना पड़ता है। -संदीप, छात्र
जिले में विश्वविद्यालय स्थापित होने से विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर पढ़ाई के अधिक विकल्प मिलेंगे और बाहर जाने की परेशानी कम होगी। -निखिल, छात्र
बीकॉम और बीबीए जैसे पाठ्यक्रमों की मांग अधिक है। कॉलेजों में सीटें बढ़ाई जाएं, ताकि विद्यार्थियों को दाखिले के लिए भटकना न पड़े। -मानल, छात्र
दूसरे शहर में पढ़ाई करने से आने-जाने और रहने का खर्च बढ़ता है। जिले में उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ने चाहिए। -शुभम, छात्र