-तय जमीन पर बस चुकी हैं कॉलोनियां, निवासियों को सता रहा घर टूटने का डर
–वर्षों से बसे आशियानों पर चलेगा प्रशासन का बुलडोजर
-मुआवजा लेने के बाद भी सैकड़ों परिवार असमंजस में
शेरसिंह डागर
नूंह। नूंह शहर में एक बार फिर हुडा (हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण) सेक्टरों की फाइलें खुलते ही सैकड़ों परिवारों की नींद उड़ गई है। जिन जमीनों पर लोग पिछले कई सालों से पक्के मकान बनाकर रह रहे थे, वहीं अब प्रशासन सेक्टर विकसित करने की तैयारी में जुट गया है। अचानक तेज हुई इस कवायद ने इलाके में डर, गुस्सा और असमंजस का माहौल पैदा कर दिया है। लोगों को सबसे बड़ा भय अपने आशियाने उजड़ने का है।
दरअसल, शहर के पुराने बस स्टैंड के सामने, पलड़ी रोड पर गुरुमुख सिंह स्कूल के आसपास का इलाका वर्षों पहले हुडा सेक्टर के लिए प्रस्तावित किया गया था। लेकिन योजना लंबे समय तक ठंडे बस्ते में पड़ी रही। प्रशासनिक सुस्ती और कानूनी पेचों के चलते कार्रवाई नहीं हुई तो लोगों ने इन जमीनों को खरीदकर यहां मकान और बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर लीं। अब जब अचानक सेक्टर बसाने की प्रक्रिया दोबारा शुरू हुई है, तो उन्हीं घरों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने कानूनी तरीके से प्लॉट खरीदे, रजिस्ट्री कराई और बिजली-पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं भी लीं। कई परिवार तो पिछले 10–15 साल से यहां रह रहे हैं। ऐसे में प्रशासन द्वारा जमीन अधिग्रहण और तोड़फोड़ की खबरों ने लोगों को मानसिक तनाव में डाल दिया है।
मुआवजा बांटे जाने की प्रक्रिया शुरू
कुछ प्रभावित परिवारों को मुआवजा राशि बांटे जाने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है, लेकिन लोग इसे समाधान नहीं मान रहे। उनका कहना है कि “सरकार पहले जमीन वापसी की बात करती रही, इसलिए हमने मकान बनाए। अब अचानक मुआवजा देकर घर खाली कराने की तैयारी की जा रही है। इतने साल चुप रहने के बाद अब कार्रवाई क्यों हो रही है।
काफी पुरानी है हुडा सेक्टर योजना
जानकार बताते हैं कि हुडा सेक्टर की योजना काफी पुरानी है, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक कारणों से आगे नहीं बढ़ पाई। इसी दौरान अवैध और वैध दोनों तरह के निर्माण हो गए। अब जब सरकार फिर से विकास योजनाओं को गति देना चाहती है, तो जमीन खाली कराना आसान नहीं होगा। कई जगह पक्के मकान, दुकानें और बहुमंजिला इमारतें बन चुकी हैं, जिन्हें हटाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती साबित होगा।
नियमानुसार दिया जा रहा मुआवजा
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि सेक्टर सरकार की स्वीकृत परियोजना है और नियमानुसार मुआवजा दिया जा रहा है। आगे की कार्रवाई भी कानूनी प्रक्रिया के तहत होगी। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पहले से बसे परिवारों के लिए कोई पुनर्वास नीति या वैकल्पिक प्लॉट की व्यवस्था होगी या नहीं। यही अनिश्चितता लोगों की चिंता और बढ़ा रही है।
घर तोड़े गए तो होगा प्रदर्शन
इलाके में जन आक्रोश भी पनपने लगा है। स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि बिना उचित पुनर्वास और पर्याप्त मुआवजे के घर तोड़े गए, तो वे सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। कई जनप्रतिनिधियों ने भी सरकार से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की मांग की है। फिलहाल नूंह में हुडा सेक्टरों को लेकर हालात असमंजस भरे हैं। एक ओर विकास की योजनाएं हैं, तो दूसरी ओर वर्षों से बसे परिवारों का आशियाना। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक रूप से बड़ा रूप ले सकता है। अब सबकी निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।