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Faridabad News: जिले में छह लघु वन विकसित किए जाएंगे

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हरियाली बढ़ाने पर 3.60 करोड़ खर्च करेगा वन विभाग, टेंडर आमंत्रित किए गए
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2031 तक निजी एजेंसी संभालेगी पौधों की देखभाल

संवाद न्यूज एजेंसी


फरीदाबाद। जिले में हरियाली का दायरा बढ़ाने के लिए वन विभाग ने नई पहल शुरू की है। विभाग की ओर से जिले के छह अलग-अलग क्षेत्रों में लघु वन विकसित किए जाएंगे। इसके लिए 3.60 करोड़ रुपये की लागत से टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। योजना के तहत पौधे लगाने के बाद उनकी देखभाल भी सुनिश्चित की जाएगी। चयनित एजेंसी वर्ष 2031 तक पौधों की सिंचाई, सुरक्षा और रखरखाव करेगी।



योजना में दयालपुर, सिकरौना, बल्लभगढ़, पाली, सूरजकुंड और तिगांव को शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों में उपलब्ध भूमि और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार पौधों की प्रजातियों का चयन किया जाएगा। इसके साथ ही शहर में सड़कों के किनारे और डिवाइडर पर भी पौधारोपण किया जाएगा। विभाग का लक्ष्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखते हुए विकसित करना है।
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पौधे लगाने के बाद पांच साल तक होगी निगरानी



लघु वन विकसित करने के लिए जिस एजेंसी को काम दिया जाएगा, उसे पौधारोपण के बाद लंबे समय तक इनकी जिम्मेदारी संभालनी होगी। एजेंसी पौधों की सिंचाई, खाद, निराई-गुड़ाई और सुरक्षा के साथ नियमित निगरानी करेगी। वन विभाग का मानना है कि लगातार देखभाल से पौधों के जीवित रहने की दर बढ़ेगी और आने वाले वर्षों में ये क्षेत्र घने हरित क्षेत्र के रूप में विकसित हो सकेंगे।



पाली में सबसे अधिक 15 हेक्टेयर में पौधरोपण



योजना के तहत दयालपुर में लघु वन विकसित करने पर 72.06 लाख रुपये खर्च होंगे। सिकरौना में 56.04 लाख रुपये की लागत से सात हेक्टेयर भूमि पर पौधे लगाए जाएंगे। बल्लभगढ़-2 में नौ हेक्टेयर भूमि के लिए 72.06 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। पाली में सबसे बड़े क्षेत्र में पौधरोपण होगा। यहां 15 हेक्टेयर भूमि पर पौधे लगाने के लिए करीब 1.20 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सूरजकुंड में 15 रनिंग किलोमीटर क्षेत्र में पौधरोपण पर 24.38 लाख रुपये खर्च होंगे। तिगांव खंड को भी योजना में शामिल किया गया है।



वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार लघु वनों और सड़क किनारे पौधरोपण से जिले का हरित क्षेत्र बढ़ेगा। इससे पर्यावरण संतुलन सुधारने और प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
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जिले में हरित क्षेत्र बढ़ाने के उद्देश्य से छह स्थानों पर लघु वन विकसित किए जाएंगे। पौधरोपण के साथ इनकी देखभाल और संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। चयनित एजेंसी को वर्ष 2031 तक पौधों की सिंचाई, सुरक्षा और रखरखाव की जिम्मेदारी दी जाएगी, ताकि लगाए गए पौधे सुरक्षित रहकर बड़े वृक्षों का रूप ले सकें।-झलकार उयके, जिला वनमंडल अधिकारी
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