मनोरोग विशेषज्ञ की सलाह
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सविता सिंह ने बताया कि आज के समय में माता पिता नौकरी करते है। जिसके कारण बच्चों को समय नहीं दे पा रहे है। इसलिए बच्चे फोन के जरिए अपने अकेलेपन को दूर करते है। दूसरा कोराना काल में बच्चे पढ़ाई को लेकर भी खूब मोबाइल का प्रयोग किया। ऐसे में उनमें एक प्रकार से मोबाइल की तल लग गई है। डॉ. सविता सिंह ने बताया कि अगर बच्चे मोबाइल न मिलने पर गुस्सा आता है। बच्चे को पता भी नहीं होता है कि वह जो कर रहा है वह अपराध है। उसके बाद क्या होगा उसकी जानकारी भी नहीं होती है। परिजनों को शाम को नौकरी से आने के बाद बच्चों के साथ बिना माेबाइल के विभिन्न गतिविधि के जरिए बात व खेलना चाहिए।
अभिभावक राजकिशोर कर्दम ने कहा कि कोरोना काल में बच्चों की पढ़ाई पर कोई असर ना हो उसके लिए फोन दिलाया था। जोकि अब उनको काफी नुकसान हो रहा है। बच्चे अब उनकी बात को सुनते नहीं है। फोन उनको अपने ही बच्चों से दूर कर रहा है।