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फरीदाबाद: झूठी आन की खातिर हत्या के दोषी एसआई पिता व हवलदार चाचा को उम्रकैद की सजा

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- चुन्नी से गला दबाकर पंखे से लटका दिया था शव
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-सबूत मिटाने के लिए थे पूरे प्रयास, हुआ पर्दाफाश
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। झूठी आन की खातिर दो माह की गर्भवती बेटी की हत्या करने के आरोपी पिता व चाचा को दोषी करार देते हुए अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। पिता जीआरपी में एसआई और चाचा हरियाणा पुलिस में हवलदार था। आरोपियों ने युवती की चुन्नी से गला दबाकर हत्या करने के बाद शव घर से पंखे से लटका दिया था। आरोपी पूरे मामले को आत्महत्या दिखाने की कोशिश में थे।
18 मार्च 2021 थाना शहर बल्लभगढ़ में मृतका के पति सागर ने शिकायत दी थी कि उसकी पत्नी के पिता व चाचा ने उसकी हत्या कर दी है। पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी। पूछताछ में सामने आया कि मृतका कोमल ने परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी की थी। पिता सोहनपाल एसआई और हवलदार चाचा शिव कुमार को ये बात पसंद नहीं और दोनों ने मिलकर कोमल की हत्या कर दी थी। पुलिस ने दोनों को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। सागर ने बताया कि मृतका ने 8 फरवरी को सागर यादव के साथ आर्य समाज मंदिर सेक्टर-64 बल्लबगढ़ में शादी करने के बाद पुलिस प्रोटेक्शन लिया था। शादी के बारे में कोमल के परिजनों को पता लगा तो दोनों पक्षों ने पंचायत करने के बाद सामाजिक विवाह की बात तय कर दी। 15 मार्च 2021 को दोनों की सामाजिक शादी होनी थी। तब तक के लिए कोमल को परिजन अपने साथ ले गए। दोनों पक्षों के सामने 19 फरवरी को सागर और कोमल की सगाई कर दी गई। आरोपी पिता सोहनपाल ने सागर के पिता से कहा कि उनके किसी संबंधी की मृत्यु हो जाने के कारण 15 मार्च को शादी नहीं हो पाएगी कोई और डेट पर शादी करेंगे। इसके बाद कोमल ने अपने पति सागर को फोन पर बताया कि पिता शादी के पक्ष में नही हैं, वह उस पर दूसरी जगह शादी का दबाव बना रहे हैं। 17 मार्च को कोमल पति सागर से मिलने एक रेस्टोरेंट में गई और कहा कि वह वापस पिता के घर नहीं जाना चाहती है। इस पर सागर ने उसे केवल भ्रम बताकर वापस पिता के घर भेज दिया। 17 मार्च की रात को कोमल ने पति सागर को वाट्सअप पर संदेश भेजकर बताया पिता सोहन पाल और चाचा शिवकुमार घर के मुख्य गेट के पास लाइट बंद कर आपस में बात कर रहे हैं। उसे डर है कि दोनों उसे कोई नुकसान पहुंचा सकते हैं। कुछ देर बाद कोमल का मोबाइल बंद हो गया। सुबह 18 मार्च को कोमल की सहेली ने सागर को फोन पर बताया कि कोमल ने आत्महत्या कर ली है। पिता और चाचा ने कोमल को अपने गांव सहराला ले जाकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
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33 गवाहों और पुलिस की पुख्ता जांच ने दिलाई सजा
आरोपियों को सजा दिलाने में तत्कालीन थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सुदीप और अग्रसेन चौकी प्रभारी एसआई विनोद गौतम की अहम भूमिका रही। मामले की जांच एसआई विनोद ने ही की थी। केस में कुल 33 गवाह बनाए गए थे। तीन माह के भीतर 15 जून को पुलिस ने अपनी चार्जशीट फाइल कर दी थी। आरोपियों ने अपनी तरफ से केस को आत्महत्या का रूप देने की पूरी कोशिश की थी। कोमल की हत्या कर शव पंखे से लटकाने के बाद आरोपियों ने शव का फोटो भी लिया था। पैर के पास स्टूल पड़ा दिखाया गया था। वारदात की रात आरोपी एसआई सोहनपाल जीआरपी थाने में जाकर ड्यूटी रजिस्टर पर हस्ताक्षर करके आया और आगरा की रेल में चढ़ गया ताकि उसे वारदात स्थल से दूर दिखाया जा सके। शव को ले जाने से पहले आरोपी घर के पास बाइक से रेकी भी करके आए थे। पुलिस ने अपनी गहन जांच में आरोपियों के झूठ का पर्दाफाश कर दिया। कोमल की वाट्सएप चैट और कोमल की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट अहम सबूत साबित हुए। कोमल करीब दो माह की गर्भवती भी थी। सरकारी अधिवक्ता एके चौहान ने भी केस को अंजाम तक पंहुचाने में पूरी मेहनत की। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमृत सिंह चालिया की अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई है।
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