फरीदाबाद। वायुसेना के मालवाहक विमान एएन-32 विमान हादसे में अपने लाडले फ्लाइट लेफ्टिनेंट राजेश थापा के शहीद होने की खबर सुनकर उनकी दादी रामा माया थापा की तबियत बिगड़ गई है। वहीं परिवार में मातम छाया है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। शुक्रवार को उनका पार्थिव शरीर फरीदाबाद पहुंचने की उम्मीद थी, मगर मौसम खराब होने व अन्य औपचारिकताओं के कारण नहीं आ सका। जिला सैनिक बोर्ड के सचिव ने बताया कि अगर मौसम साफ रहा तो शनिवार शाम तक उनका पार्थिव शरीर फरीदाबाद पहुंचेगा। फ्लाइट लेफ्टिनेंट थापा को सैनिक सम्मान के साथ विदाई देने के लिए आया नगर, दिल्ली स्थित एयरफोर्स स्टेशन को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मूलरूप से नेपाल के रहने वाले फ्लाइट लेफ्टिनेंट राजेश थापा यहां सेक्टर-23 में रहते थे। इस समय उनकी पोस्टिंग जोरहाट, असम में थी। 3 जून को लापता हुए वायुसेना के एएन-32 विमान में राजेश थापा भी सवार थे। जब से उनके लापता होने के बारे में पता चला था तो परिजनों के अलावा दोस्त-रिश्तेदार भी उनकी सलामती की दुआ कर रहे थे। मगर बृहस्पतिवार को जैसे ही खबर आई कि विमान में सवार कोई भी सैन्यकर्मी नहीं बचा है तो उनके नाते रिश्तेदारों में मातम छा गया। हालांकि बृहस्पतिवार को आस पड़ोस के लोगों ने इस खबर की भनक थापा की दादी रामा माया थापा और मां शिवा थापा को नहीं लगने दी थी। शुक्रवार को उन्हें इस घटना के बारे में पता चला तो रामा माया थापा की तबियत बिगड़ गई। परिजना किसी को भी उनसे नहीं मिलने दे रहे हैं। फ्लाइट लेफ्टिनेंट राजेश थापा की मां, भाई, बहन व परिवार के अन्य लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है।
जिला सैनिक बोर्ड के सचिव मेजर आरके शर्मा ने बताया कि मौसम खराब होने और कुछ अन्य औपचारिकताओं के कारण शुक्रवार को उनका पार्थिव शरीर नहीं आ पाया। मेजर शर्मा ने बताया कि शनिवार को मौसम साफ रहा तो ही उनके पार्थिव शरीर को रवाना किया जाएगा। जोरहाट से उनके चाचा को वापस भेज दिया गया है, जबकि उनके पिता हरि थापा अभी वहीं हैं। फ्लाइट लेफ्टिनेंट थापा को सैनिक सम्मान के साथ विदाई देने के लिए आया नगर, दिल्ली स्थित एयरफोर्स स्टेशन को जिम्मेदारी सौंपी गई है।