राजकीय बालिका वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एनआईटी-2 और 3 के जर्जर घोषित 27 कमरों होगी जांच
आरटीआई कार्यकर्ता ने घटिया निर्माण सामग्री लगाकर भ्रष्टाचार के लगाए आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। राजकीय बालिका वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एनआईटी-2 और एनआईटी-3 के करीब 27 कमरे अपने निर्माण के 12 वर्ष में ही जर्जर घोषित हो गए। एक आरटीआई कार्यकर्ता ने इस मामले में जानकारी मांगी तो अधूरी जानकारी मिलने के बाद इसकी शिकायत प्रदेश सूचना विभाग को की गई। प्रदेश सूचना विभाग की ओर से जानकारी मांगी गई तो पता चला कि इन कमरों का निर्माण 10 से 12 वर्ष पूर्व हुआ है। राज्य सूचना आयुक्त की ओर से जिले के एडीसी को इन दोनों स्कूलों में जांच का जिम्मा सौंपा गया ।
जिले के राजकीय विद्यालयों में करोड़ों की लागत से बने भवन मात्र 10 से 12 वर्षों में ही जर्जर होने की कगार पर पहुंच रहे हैं। ऐसे में शिक्षकों के साथ-साथ हमारे नौनिहालों की जान को खतरा भी बना हुआ है। एक ऐसा ही मामला सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता ने दो स्कूलों में निर्माण हुए कमरों को लेकर उठाया है।
एनआईटी-2 व 3 स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में कुछ कमरे जर्जर हालत में पहुंच गए थे। जर्जर कमरों की मामले में अभिभावकों ने शिकायत दी थी। शिकायत के बाद लोक निर्माण विभाग की ओर से एनआईटी-2 के 12 और एनआईटी-3 विद्यालय में 15 कमरों का सर्वे कर इसको जर्जर घोषित कर दिया गया। समग्र शिक्षा विभाग ने 2024 में इन भवनों के पुनर्निर्माण के लिए 3-5 करोड़ रुपये के नए अनुदान की स्वीकृति दे दी गई। इस मामले को वर्ष 2023 दिसंबर में आरटीआई कार्यकर्ता अजय बहल ने लोक निर्माण विभाग में आरटीआई से सूचना मांगी। यहां से अधूरी जानकारी मिलने पर इसकी शिकायत हरियाणा राज्य सूचना आयोग आयुक्त ज्योति अरोड़ा से की गई।
मामले में राज्य सूचना आयोग की मांगी गई जानकारी में 25 अप्रैल और 16 सितंबर 2024 को दिए गए जवाबों में यह तथ्य सामने आया कि एनआईटी-2, एनआईटी-3 सहित 12 सरकारी स्कूलों के भवन जर्जर हाल हैं। उन्हें वर्ष 2023 में असुरक्षित और क्षतिग्रस्त घोषित किया गया। इनमें से एनआईटी-2 के 12 कमरे और एनआईटी 3 के 15 कमरे जर्जर होने की बात सामने आई। इन सभी कमरों का निर्माण 2012-13 में समग्र शिक्षा विभाग, फरीदाबाद की ओर से कराया गया था। आरटीआई कार्यकर्ता का आरोप है कि इन कमरों के निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया। इसमें समग्र शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मियों की मिलीभगत है।