निजी वाहनों या महंगे ऑटो पर रहना पड़ता है निर्भर, जेब पर पड़ रहा आर्थिक बोझ
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। ग्रेटर फरीदाबाद की हाईराइज सोसाइटियों में रहने वाले हजारों परिवारों के लिए घर से बाहर निकलना किसी चुनौती से कम नहीं है। सेक्टर 75 से लेकर 89 तक और सेक्टर 82, 83, 84 के साथ नेहरू कॉलोनी से सटी नई रिहायशी सोसाइटियों में सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था चरमराई हुई है। इन इलाकों में सरकारी बस सेवा लगभग न के बराबर है जिसकी वजह से लोगों को हर छोटे-बड़े काम के लिए निजी वाहनों या महंगे ऑटो पर निर्भर रहना पड़ता है।
इन सोसाइटियों में रहने वाले लोगों की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि नजदीकी बस स्टॉप की दूरी दो से तीन किलोमीटर तक है। इतनी लंबी दूरी तय करने के बाद ही कोई बस मिल पाती है। सबसे ज्यादा परेशानी उन बुजुर्गों और महिलाओं को होती है जिन्हें किसी काम से शहर के दूसरे हिस्सों में जाना पड़ता है। कॉलेज और दफ्तर जाने वाले युवाओं को भी रोजाना इसी समस्या से जूझना पड़ रहा है। मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए भी ई-रिक्शा या ऑटो का सहारा लेना पड़ता है जो समय और पैसा दोनों बर्बाद करता है।
सेक्टर 78 और 79 के निवासियों ने बताया कि सुबह और शाम के समय जब दफ्तर जाने या आने का वक्त होता है तब ऑटो चालक मनमाना किराया वसूलते हैं। बस सेवा का कोई विकल्प न होने के कारण लोग उनकी हर जायज-नाजायज मांग को मानने के लिए मजबूर हैं। पाली और भूपानी रोड जैसे क्षेत्रों में बस रूट चलाने के प्रस्ताव तो कई बार बने लेकिन उन्हें कभी नियमित रूप से लागू नहीं किया गया।
सफर में होने वाले इस खर्च का सीधा असर मध्यमवर्गीय परिवारों की जेब पर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन एक तरफ तो बड़ी-बड़ी सोसाइटियां बसाने की अनुमति दे देता है लेकिन वहां रहने वाले लोगों के लिए परिवहन जैसी बुनियादी सुविधा देना भूल जाता है। निवासियों की मांग है कि अगर इन सेक्टरों के अंदरूनी रास्तों को जोड़ते हुए मिनी बसें या सिटी बसें चलाई जाएं तो हजारों लोगों का सफर आसान हो सकता है।