सेक्टर-11 में 232 और एनआईटी में 297 पहुंचा वायु गुणवत्ता सूचकांक
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। शहर में बदलते मौसम और पराली जलाने के कारण वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। सोमवार को जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक 190 के स्तर को पार कर गया। शहर के तीन स्टेशनों में से सेक्टर-11 के एचएसपीसीबी केंद्र पर एक्यूआई 297 के स्तर को पार कर ऑरेंज जोन में पहुंच गया। एनआईटी केंद्र पर वायु गुणवत्ता सूचकांक का स्तर 232 तक पहुंच गया। मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार दोनों स्थानों पर पहुंचे प्रदूषण के इस स्तर से लंबे समय तक संपर्क में रहने से अधिकांश लोगों को सांस लेने में तकलीफ होती है। आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर गंभीर स्थिति में पहुंचने की संभावना जताई गई है।
बदलते मौसम और नमी के असर से अक्तूबर माह के मध्य से फरीदाबाद इस वर्ष फिर से गैस चेंबर में बदलने जा रहा है। हवा में तेजी न होने के चलते पराली जलाने, सड़क और निर्माणाधीन इमारतों से निकलने वाली धूल, वाहनों और उद्योगों से निकलने वाले धुएं और जहरीली गैसों से औद्योगिक शहर में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। सेक्टर-11 स्थित हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के केंद्र पर प्रदूषण पीएम 10 (पर्टिकुलेट मैटर) का स्तर 434 को पार कर गया है। इसके अलावा पीएम 2.5 का स्तर पर भी 336 पर पहुंच गया है। एनआईटी केंद्र में भी पीएम 10 का स्तर 400 और पीएम 2.5 का स्तर 294 पर पहुंचा हुआ है। मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार लंबे समय इस प्रदूषण में रहने से लोगों को सांस की तकलीफ हो सकती है। हालांकि, तीसरे केंद्र पर सेक्टर-30 पर वायु गुणवत्ता सूचकांक ग्रीन श्रेणी में 61 पर बना हुआ है।
मौसम विभाग के अनुसार सोमवार को न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। मंगलवार को भी लगभग इतना ही तापमान रहने की संभावना है। साथ ही धूप खिली रहेगी। यदि मंगलवार को भी हवा तेज नहीं चलती है तो प्रदूषण का स्तर बढ़ने की संभावना है।
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हानिकारक गैसों का स्तर भी बढ़ा
सेक्टर-11 केंद्र पर नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड का स्तर 32, अमोनिया का स्तर 6, सल्फर डाइऑक्साइड का स्तर 4, कार्बन मोनो ऑक्साइड का स्तर 64 और ओजोन का स्तर 12 अधिकतम पर पहुंचा है। इसी तरह एनआईटी केंद्र पर औद्योगिक क्षेत्र होने के चलते नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड का स्तर 25, अमोनिया का स्तर 9, सल्फर डाइऑक्साइड का स्तर 13, कार्बन मोनो ऑक्साइड का स्तर 87 और ओजोन का स्तर 72 अधिकतम पर पहुंचा है। गैसों का स्तर बढ़ने से इन क्षेत्रों के अंतर्गत रहने वाले लोगों के फेफड़ों को अधिक नुकसान पहुंचता है।