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रैंडम जांच : आधा दिन बीता तब शुरू हुई जांच

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बदरपुर बॉर्डर पर दोपहर करीब सवा बजे पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम कोरोना जांच से पहले तैयारी करत? - फोटो : Faridabad
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फरीदाबाद (संजय शिशौदिया)। बीते एक सप्ताह से फरीदाबाद में कोरोना संक्रमण की तेज हुई लहर ने स्वास्थ्य विभाग के हाथ-पांव फुला दिए हैं। बृहस्पतिवार को प्रदेश के स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. वीके बंसल के आदेश के बाद दिल्ली से फरीदाबाद आने वाले लोगों की बदरपुर-सराय बॉर्डर पर रैंडम जांच शुरू की गई। ताज्जुब ये रहा कि पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के बीच आपसी तालमेल की कमी से पहले दिन दोपहर 1 बजकर 20 मिनट के बाद कोरोना जांच का काम शुरू हुआ।
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भटूरे वाले की बेंच, सिक्योरिटी गार्ड की कुर्सी...शुरू हुई कोविड जांच
स्वास्थ्य विभाग की एक वैन फरीदाबाद बॉर्डर पर पहुंची। उसके पीछे-पीछे चल रही पुलिस की पीसीआर-1 भी सायरन बजाते हुए चल रही थी। बॉर्डर पर ऑटो स्टैंड के सामने स्थित एफबीडी कर्मशियल इमारत के बाहर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की गाड़ियां रुकीं तो गेट पर तैनात सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हो गए। स्वास्थ्य विभाग की वैन से चार कर्मचारी और पुलिस पीसीआर से तीन पुलिसकर्मी उतरे और आपस में बात करने लगे। दरअसल, कोरोना जांच को टीम तो पहुंच गई थी, मगर टीम के पास न तो बैठने के लिए कुर्सियां थीं और न ही जांच किट रखने के लिए टेबल। समस्या का समाधान पुलिसर्मियों ने चुटकी बजाकर कर दिया। पास ही ठेले पर छोले-भठूरे बेचने वाली की बेंच उठाकर उस पर कोरोना की रेपिड एंटीजन किट सजाई गईं, और सिक्योरिटी गार्ड्स से उनकी कुर्सी ले ली गईं। एक कुर्सी पर बैठकर स्वास्थ्य विभाग की महिला कर्मचारी लोगों का डाटा तैयार करने लगीं, जबकि दूसरी कुर्सी उन लोगों के लिए खाली रखी गई, जिनके सैंपल लिए जाने थे।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दोपहर तक पुलिस बल का किया इंतजार
स्वास्थ्य और पुलिस विभाग के आपसी तालमेल की वजह से बॉर्डर पर पहले दिन कोरोना जांच पूरी तरह से अव्यवस्था का शिकार नजर आई। डीजी हेल्थ के आदेश के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तो अपनी टीम को सुबह साढ़े दस बजे ही रवाना कर दिया, मगर पुलिस विभाग से तालमेल न किए जाने की वजह से इसके लिए पुलिस बल उपलब्ध न हो पाया। दोपहर करीब एक बजे तक स्वास्थ्य विभाग की टीम सराय थाने में पुलिस बल के इंतजार में बैठी रही। बाद में पुलिस की पीसीआर-1 को टीम के साथ भेजा गया।
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रैंडम नहीं, निशुल्क जांच का वास्ता देकर लिए सैंपल
दिल्ली से फरीदाबाद की सीमा में आने वाले लोगों की कोरोना जांच रैंडम तरीके से की जानी थी, मगर पहले दिन स्वास्थ्य कर्मचारियों को इस अभियान की शायद ठीक से जानकारी ही नहीं थी। यही कारण रहा कि जांच के लिए पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी लोगों की मिन्नत करते नजर आए। इसके लिए लोगों को निशुल्क कोरोना जांच का वास्ता दिया गया। कुछ लोग जांच के लिए तैयार हुए और कुछ ने जांच कराने से साफ इनकार कर दिया।
सैंपल तो लिए, मगर रिपोर्ट नहीं दी
दिल्ली से बदरपुर बॉर्डर पार करके फरीदाबाद के सराय बॉर्डर में आने वाले लोगों की कोरोना जांच के लिए सैंपल तो लिए गए, मगर रैपिड एंटीजन टेस्ट किट होने के बावजूद उन्हें रिपोर्ट नहीं दी गई। लोगों के सैंपल लेकर रखे हुए जब एक से डेढ़ घंटे तक भी उन्हें कुछ नहीं बताया गया तो धीरे-धीरे लोग खिसक लिए। वैसे भी स्वास्थ्य विभाग की टीम पहले दिन सिर्फ इसी बात पर ध्यान दे रही थी कि लोगों के सैंपल लेने हैं। ऐसे में सैंपल देकर लोग जाते रहे। वहां मौजूद स्वास्थ्य विभाग कर्मचारियों का तर्क था कि लोगों को उनके मोबाइल पर रिपोर्ट बता दी जाएगी। सवाल यह उठता है कि रिपोर्ट अगर मोबाइल पर ही बतानी थी तो फिर बॉर्डर पर इस तरह की सख्ती का क्या फायदा।
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