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मुआवजे के लिए दो गांव की निशानदेही पर उठे सवाल

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फरीदाबाद। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) की अजरौंदा व दौलताबाद गांव में मुआवजे को लेकर हुई निशानदेही पर सवाल उठ रहे हैं।
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आरोप है कि जो लोग एचएसवीपी की जमीन पर कब्जा करके बैठे हुए हैं, उन्होंने भी बढ़े हुए मुआवजे के लिए दावा कर रखा है। यह कारनामा जमीन की निशानदेही करने वाले कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से होने का आरोप है। इस मामले की जांच के लिए सरपंच कॉलोनी निवासी अजय सैनी ने एचएसवीपी प्रशासक प्रदीप दहिया को शिकायत की है। प्रशासक ने मामले की जांच के निर्देश दे दिए हैं।
400 करोड़ रुपये है मुआवजा
राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे अजरौंदा व दौलताबाद गांव की जमीन को एचएसवीपी ने वर्षों पहले अधिगृहीत कर लिया था। असल मुआवजा लेने के बाद जमीन मालिक बढ़े हुए मुआवजे के लिए सुप्रीम कोर्ट चले गए थे। करीब दो साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने एचएसवीपी को बढ़ा हुआ मुआवजा देने के निर्देश दिए। यह मुआवजा करीब 400 करोड़ रुपये बन था, लेकिन एचएसवीपी ने अभी तक ग्रामीणों को मुआवजा नहीं दिया है।
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मुआवजे के दावे पर उठे सवाल
एचएसवीपी के तत्कालीन मुख्य प्रशासक पंकज यादव ने मुआवजा देने से पहले दोनों गांव की निशानदेही करवाई थी। निशानदेही के दौरान यह देखा गया था कि दोनों गांव में प्राधिकरण द्वारा कुल कितनी जमीन अधिग्रहण की थी, कितनी पर कब्जे व अतिक्रमण हैं और कितनी खाली पड़ी है। साथ ही यह भी देखा गया कि कितनी जमीन पर मालिकों ने ही कब्जा कर रखा है। दावा किया गया था कि जिन ग्रामीणों ने अधिगृहीत जमीन पर कब्जे किए होंगे, उन्हें बढ़ा हुआ मुआवजा नहीं मिलेगा।
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