संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। अरावली की वादियों में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड आत्मनिर्भर शिल्प मेले में देशभर के कारीगर अपनी पारंपरिक कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी क्रम में पंजाब के पटियाला से आए शिल्पकार प्रदीप कुमार स्टॉल नंबर 987 पर पंजाबी जूती और चप्पलों की विविध श्रृंखला प्रस्तुत कर रहे हैं, जो खासकर महिलाओं को आकर्षित कर रही है।
प्रदीप कुमार ने बताया कि उनका परिवार करीब चार दशकों से इस मेले में भाग ले रहा है और यह कार्य उनके लिए व्यापार से बढ़कर पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा है। दादा और पिता से मिली इस कला को वह आगे बढ़ाते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी कारीगरी का एक उदाहरण नौ फीट लंबी पंजाबी जूती का निर्माण भी है, जो उनके कौशल और रचनात्मकता को दर्शाता है।
उनके स्टॉल पर हैंडमेड जूती, जरी वर्क, जरकन नग जड़ी चप्पलें, कढ़ाईदार डिज़ाइन और पारंपरिक से आधुनिक शैली तक के फुटवियर उपलब्ध हैं। इनकी कीमत 350 से 650 रुपये के बीच रखी गई है, जिससे हर वर्ग के लोग खरीदारी कर सकें। गुणवत्ता और आकर्षक डिजाइन के कारण ग्राहकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है।
प्रदीप कुमार ने बताया कि जूती पर की जाने वाली कढ़ाई और सजावट का कार्य अधिकतर जरूरतमंद महिलाओं द्वारा किया जाता है, जिससे उन्हें रोजगार का अवसर मिलता है। उनके अनुसार पंजाबी जूती केवल पहनावा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और विरासत का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य इस शिल्पकला को जीवित रखना और युवाओं को इससे जोड़ना है। सूरजकुंड मेला कारीगरों को मंच देकर न केवल उनकी कला को बढ़ावा देता है, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।