फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल्ली के नाम पर खोरी गांव में प्रॉपर्टी डीलरों ने बेचे प्लॉट

विज्ञापन
विज्ञापन
फरीदाबाद। सभी का सपना होता है, दिल्ली-एनसीआर में अपना आशियाना हो। इसी का फायदा उठाते हुए स्थानीय प्रॉपर्टी डीलरों ने अरावली वन क्षेत्र में हजारों लोगों को बसा दिया। यहां बसने वाले अधिकांश लोगों को यही बताया गया था कि उन्हें दिल्ली में जगह दी जा रही है। खून-पसीन के कमाई से बनाए गए हजारों गरीबों के आशियानों को अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जिला प्रशासन तोड़ रहा है।
विज्ञापन

फरीदाबाद शहर से करीब 15 किलोमीटर दूर सूरजकुंड के पास पुराना खोरी गांव बसा है। पुराने खोरी गांव के साथ खोरी गांव अरावली वन क्षेत्र में बसा है। दूसरी ओर खोरी गांव लालकुआं चुंगी नंबर तीन दिल्ली का क्षेत्र से सटा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि पहले अरावली क्षेत्र में खनन कार्य के कारण गहरी खाइयां थी। ऐसे में करीब 50 साल पहले दिल्ली-हरियाणा बार्डर पर लोहे की जाली लगाई गई थी। लेकिन, धीरे-धीरे लोग लालकुआं दिल्ली की ओर से हरियाणा की ओर खोरी गांव की ओर से बसना शुरू हो गए।
स्थानीय प्रॉपर्टी डीलरों ने लोगों को अपनी जमीन बनाकर 30 से लेकर 100 वर्ग गज तक के प्लॉट बेचे। प्लॉट लेने वालों में अधिकांश गरीब तबके के लोग हैं। कानपुर यूपी निवासी कमला बताती हैं कि बीस साल पहले संगम विहार दिल्ली में किराए के मकान में रहती थी। उनके एक जान पहचान के व्यक्ति ने खोरी में प्लॉट लिया था। कमला बताती है कि पहले लालकुआं से सटे क्षेत्र में पानी और बिजली की कोई समस्या नहीं थी। प्रॉपर्टी डीलरों ने पानी का अच्छा इंतजाम कराया हुआ था। ऐसे में इन लोगों ने 80 गज का प्लॉट लेकर करीब 15 लाख में बनवाया था। उनका कहना हैं कि अब उन्हें पता चला है कि यह क्षेत्र हरियाणा का है। उनका कहना हैं कि यदि यह क्षेत्र अवैध था तो पहले ही रोका जाना चाहिए था।
विज्ञापन

प्रॉपर्टी डीलरों के साथ अन्य सरकारी विभाग मिले हुए थे
लोगों ने बताया कि शुरुआत में कुछ लोगों ने लालकुआं की ओर से घर बनाना शुरू किया था। इसके बाद प्रॉपर्टी डीलर धीरे-धीरे जमीन बेचते चले गए। प्रॉपर्टी डीलरों ने लोगों को स्टांप पेपर व डायरी में पैसे लिखकर जमीन पर कब्जा दे देते थे। कुछेक ने तो लोगों से किस्त पर पैसे वसूले। वहीं लाल डोरा की जमीन अरावली में प्लॉट बताकर बेचा। स्थानीय लोगों ने बताया कि घर की नींव व दीवार बनाते समय पुलिस व वन विभाग के लोग आ जाते थे। काम रोकने के नाम पर पांच हजार रुपये ले जाते थे। सुरेश का कहना हैं कि लोगों को मजबूरी में पैसे देने पड़े।
बिजली और पानी से होती थी कमाई
पुरानी खोरी गांव में हरियाणा सरकार और दिल्ली के लालकुआं में दिल्ली सरकार ने बिजली व पानी की सुविधा उपलब्ध है। लेकिन, खोरी गांव में पानी सप्लाई की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में कुछ लोगों ने दिल्ली व हरियाणा की बिजली को खोरी गांव के लोगों को पोल और बांस के बल्लों के सहारे पहुंचाया। कुछ लोगों ने बिजली निगम के सांठगांठ कर अवैध रूप से खोरी में बिजली का धंधा शुरू किया। लोगों ने घरों में केबल से बिजली और मीटर लगवाए। हर घर से बिजली के हर माह करीब 800 से 1000 रुपये वसूल करते थे। ये लोग 13 रुपये प्रति यूनिट लेते थे। वहीं पानी के लिए एक हजार रुपये प्रति टैंकर लेते थे। लोगों ने बताया कि सन्नी, अजय व दीपक समेत अन्य ने इसके लिए खोरी गांव को आपस में बांट कर बिजली के पैसे लेते थे। एक प्रकार से यह क्षेत्र में पूरी तरह से निजी लोग द्वारा चलाया जा रहा था। ऐसे में बिजली निगम भी कटघरे में है। आखिर हजारों लोगों के घरों तक कैसे बिजली पहुंची, इसे रोका क्यों नहीं गया।
दिल्ली-हरियाणा में सीमा विवाद
खोरी गांव में हरियाणा और दिल्ली सरकार के बीच सीमा विवाद है। इससे भी लोगों में नाराजगी है। दोनों सरकारों एक दूसरे के क्षेत्र को अपना बताती हैं। इससे भी इस क्षेत्र में अवैध कब्जे हुए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें