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Faridabad News: पुरानी ड्रेनेज व्यवस्था पर बढ़ रहा आबादी का बोझ, थोड़ी सी बारिश में डूबता है सेक्टर-8

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संवाद: सबसे पुराने सेक्टर-8 में आज भी मूलभूत सुविधाओं का इंतजार, बारिश में घरों तक पहुंचता है पानी
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- सेक्टर में जल निकासी सबसे बड़ी समस्या, सीवर ओवरफ्लो और लावारिस पशुओं से भी परेशान निवासी
संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। औद्योगिक नगरी के सबसे पुराने सेक्टरों में शामिल सेक्टर-8 के निवासी आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। रविवार को अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में आरडब्ल्यूए नार्थ वेस्ट जॉन के पदाधिकारियों और सेक्टरवासियों ने जल निकासी, सीवर सफाई और लावारिस पशुओं की समस्या प्रमुखता से उठाई। उनकी आरडब्ल्यूए के अंदर करीब 800 मकान आते हैं। उन लोगों ने कहा कि बारिश के दौरान सबसे ज्यादा परेशानी जलभराव की होती है।
मकान नंबर 314 से 334 तक ज्यादा है दिक्कत : आरडब्ल्यूए नार्थ वेस्ट के प्रधान प्रदीप भाटी ने बताया कि सेक्टर में पहले मकानों की संख्या कम थी। समय के साथ आबादी और मकानों का आकार बढ़ गया, लेकिन पुरानी ड्रेनेज पाइपलाइन की क्षमता उसी अनुपात में नहीं बढ़ी। इससे तेज बारिश होने पर पानी की निकासी नहीं हो पाती। मकान नंबर 314 से 334 तक की लाइन में जलभराव की समस्या सबसे ज्यादा रहती है। कई बार पानी घरों के अंदर तक पहुंच जाता है, जिससे फर्नीचर और अन्य जरूरी सामान खराब हो चुका है। उन्होंने बताया कि समस्या को लेकर कई बार अधिकारियों को अवगत कराया गया है। हाल में नई लाइन डाली गई है, जिसकी समय-समय पर सफाई की जाती है। इससे पहले जहां पानी चार से पांच दिन में निकलता था, अब कुछ घंटों में निकल जाता है। हालांकि लगातार बारिश होने पर समस्या फिर गंभीर हो जाती है।
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समय पर सीवर की नहीं होती है सफाई : सेक्टरवासियों ने बताया कि सीवर लाइनों की नियमित सफाई नहीं होने के कारण कई बार सीवर ओवरफ्लो होकर सड़कों पर बहने लगता है। समस्या बढ़ने पर आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों को निजी स्तर पर मशीन बुलाकर सफाई करवानी पड़ती है। उनका कहना है कि नगर निगम की ओर से नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
चार गेट, दो बंद करने पर बढ़ती है परेशानी : सेक्टर में प्रवेश के लिए चार मुख्य गेट हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार सुरक्षा और लावारिस पशुओं की समस्या को देखते हुए दो गेट बंद करने का प्रयास किया जाता है, लेकिन इससे आसपास रहने वाले लोगों को आवाजाही में परेशानी होती है। इसलिए गेट खुले रखने पड़ते हैं। खुले गेट से कुत्ते, गाय और भैंस सहित अन्य लावारिस पशु सेक्टर में प्रवेश कर जाते हैं। इससे गलियों में गंदगी फैलती है। शनिवार को एक बुजुर्ग व्यक्ति पर बंदर के हमला करने की घटना भी सामने आई। सेक्टरवासियों का कहना है कि लावारिस पशुओं की समस्या पर भी संबंधित विभाग को गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए।

बारिश के दिनों में घर के अंदर पहुंच जाता है पानी
सेक्टर में सबसे बड़ी समस्या जल निकासी की है। बारिश में मकानों के अंदर तक पानी पहुंच जाता है। नई लाइन से कुछ राहत मिली है, लेकिन स्थायी समाधान जरूरी है।- प्रदीप भाटी, प्रधान
सीवर की समय पर सफाई नहीं होने से कई बार ओवरफ्लो की स्थिति बन जाती है। आरडब्ल्यूए को निजी स्तर पर मशीन बुलाकर सफाई करवानी पड़ती है। - सविता मान, उप प्रधान
मकान नंबर 314 से 334 तक बारिश में सबसे ज्यादा पानी भरता है। घरों में पानी आने से फर्नीचर और जरूरी सामान खराब हो चुका है।- टी डी मनोचा, सदस्य
सेक्टर में आबादी और मकानों का आकार बढ़ गया, लेकिन पुरानी ड्रेनेज व्यवस्था उसी हिसाब से नहीं बढ़ी। तेज बारिश में व्यवस्था जवाब दे देती है।- वेदमित्रा, वरिष्ठ उपप्रधान
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लावारिस पशुओं के कारण गलियों में गंदगी रहती है। गेट बंद करने पर लोगों को परेशानी होती है, इसलिए मजबूरी में गेट खुले रखने पड़ते हैं।- अशोक,
बंदर और अन्य लावारिस पशुओं से लोगों को खतरा बना रहता है। शनिवार को बुजुर्ग पर बंदर ने हमला किया। प्रशासन को इस समस्या का स्थायी समाधान करना चाहिए।- नीरज
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