सरकार की अधिसूचना जारी, किले के जीर्णोद्धार से बढ़ेगा पर्यटन
18वीं शताब्दी पूर्व में बना था
ललित जिंदल
सोहना। अरावली की पहाड़ियों की तलहटी में बसा ऐतिहासिक सोहना कस्बा जल्द ही अपनी प्राचीन धरोहर सोहनगढ़ किले को नया जीवन देता देखेगा। प्रदेश सरकार ने 18वीं शताब्दी से पहले बने इस किले को संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया है और इसके जीर्णोद्धार की अधिसूचना जारी कर दी है। लंबे समय से देखरेख के अभाव में खंडहर में तब्दील हो चुका यह किला, अब एक बार फिर अपने पुराने गौरव को हासिल करने की राह पर है।
यह किला दिल्ली से करीब 50 किलोमीटर और गुरुग्राम से 25 किलोमीटर दूर स्थित है। भले ही किला आज खंडहर हो लेकिन इसकी नक्काशी और प्राचीन वास्तुकला आज भी लोगों को आकर्षित करती है। इस पहल से न केवल किले को बचाया जाएगा, बल्कि सोहना को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने में भी मदद मिलेगी।
विरासत एवं पर्यटक विभाग की प्रधान सचिव कला रामचंद्रन की ओर से जारी इस अधिसूचना के बाद स्थानीय नागरिकों में भी उत्साह है। सरकार किले को संवारने की पहल करेगी ताकि लोग किले के जीर्णोद्धार से पुराने इतिहास से फिर रूबरू हो सकें। सोहना के प्रबुद्ध नागरिक योगी समाज प्रधान सुरेंद्र योगी, व्यापारी नेता अनुज गुप्ता, व्यापार मंडल प्रधान अशोक गर्ग, सर्राफा यूनियन पूर्व प्रधान अशोक वर्मा आदि का कहना है कि प्राचीन सोहनगढ़ किले को संरक्षित करके जीर्णोद्धार किए जाने से सोहना पर्यटक स्थल के रूप में विकसित हो सकेगा। साथ ही लोगों को पुराने इतिहास का भी ज्ञान हो सकेगा।
सोने की धूल से पड़ा शहर का नाम सोहना
जारी अधिसूचना के अनुसार, सरकार रेवाड़ी में 12 महल शामिल थे, जिनमें से एक सोहना था। सोहना शहर का नाम सोने की धूल से पड़ा है। ऐतिहासिक रूप से, इस पर कम्भो, कंजादास और राजपूतों ने शासन किया था। आइन-ए-मकबरी के अनुसार, अकबर के शासनकाल में यहां किला था, और एक अन्य किला कम्भो सरदारों ने बनवाया था। बाद में, राव रामबख्श ने इसका पुनर्निर्माण किया। भरतपुर के शासकों ने भी एक अधूरा किला बनवाया था। 1600 के दशक में राव राजा राम सिंह ने सरकार रेवाड़ी के फौजदार के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान किले को संभाला था। आइन-ए-अकबरी के अनुसार, सरकार रेवाड़ी में तब 12 महल शामिल थे, जिनमें से एक सोहना था। राव राजा गूजरमल सिंह बहादुर (1739-1750 ई.) के शासनकाल के दौरान, रेवाड़ी के क्षेत्र पूर्व की और यमुना नदी तक विस्तारित हुए, जिसमें सोहना परगना भी शामिल था। बाद में, किले पर राव गूजरमल सिंह बहादुर के भतीजे राव गंगा बिशन का कब्जा था। उन्होंने यह किला अपने भाई धारूहेड़ां के राव रामबख्श को आबंटित कर दिया। बाद में राव रामबख्श ने किले का पुनर्निर्माण कराया और सोहना किले की वर्तमान संरचना उनके प्रयासों का प्रमाण है।