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Faridabad News: आरडब्ल्यूए की मनमानी के विरोध में समर पाम सोसाइटी के लोगों का प्रदर्शन

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निवासियों को बिना बताए सुरक्षा और रखरखाव एजेंसी बदली
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करीब 100 कर्मचारियों को एक साथ हटाने का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी

फरीदाबाद। सेक्टर-86 स्थित समर पाम सोसाइटी में आरडब्ल्यूए के कार्यों से नाराज निवासियों ने रविवार को विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि करीब दस वर्षों से सोसाइटी में सुरक्षा और रखरखाव का काम संभाल रही एजेंसी को आरडब्ल्यूए ने बिना निवासियों से विचार-विमर्श किए बदल दिया। नई एजेंसी को काम सौंपने के साथ ही पुरानी एजेंसी के करीब 100 कर्मचारियों को एक साथ हटा दिया गया। इससे सोसाइटी के लोगों में नाराजगी है।

निवासियों बबीता और मोहित का कहना है कि सुरक्षा और रखरखाव की पुरानी एजेंसी लंबे समय से सोसाइटी में काम कर रही थी। एजेंसी बदलने का निर्णय लेने से पहले निवासियों को विश्वास में नहीं लिया गया। उनका आरोप है कि अचानक लिए गए इस फैसले से सोसाइटी की व्यवस्थाएं प्रभावित होने की आशंका है। लोगों ने मांग की कि एजेंसी बदलने के फैसले पर दोबारा विचार किया जाए और पुरानी एजेंसी को काम सौंपा जाए।
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प्रदर्शन कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय से आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों की मनमानी बढ़ गई है। सोसाइटी में कई सुविधाओं की कमी है। बार-बार मांग उठाने के बावजूद समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि समस्याओं को लेकर सवाल पूछने पर उन्हें अलग-अलग तरीके से परेशान किया जाता है। कुछ निवासियों को सोसाइटी के ग्रुप से हटाने और अभद्र भाषा का प्रयोग करने का भी आरोप लगाया गया।

खर्च का ब्यौरा नहीं देने का आरोप

निवासियों ने आरोप लगाया कि सोसाइटी में मरम्मत या अन्य कार्यों पर दस हजार रुपये से अधिक खर्च होने पर जनरल बॉडी को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए। इसके बावजूद ईमेल के माध्यम से कई बार खर्च का विवरण मांगने के बाद भी उन्हें पूरी जानकारी नहीं दी जा रही है। लोगों ने आरोप लगाया कि बीते दिनों सोसाइटी में करीब 50 लाख रुपये का कबाड़ बेचा गया, लेकिन इससे संबंधित रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं कराया गया है।
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निवासियों ने आरडब्ल्यूए महासचिव एसएम गुप्ता को ज्ञापन देकर पुरानी एजेंसी को दोबारा सुरक्षा और रखरखाव का काम सौंपने की मांग की। उन्होंने कहा कि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो जिला प्रशासन से शिकायत की जाएगी। आरडब्ल्यूए का पक्ष जानने के लिए प्रधान मनोज झा को फोन किया गया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
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