-बीमारियों का बढ़ता खतरा, विधायकों से विधानसभा में आवाज उठाने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। नूंह जिले में संचालित बूचड़खानों को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोगों का आरोप है कि जिले में करीब आठ स्थानों पर चल रहे बूचड़खाने नियमों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं। इससे बीमारियां फैल रही हैं और पर्यावरण बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि इस मुद्दे को विधानसभा में उठाकर ठोस कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाए।
- गांव-गांव में बढ़ता विरोध
मांडी खेड़ा, जलालपुर, सटकपुरी, टपकन और नाई नंगला सहित कई गांवों में संचालित बूचड़खानों के खिलाफ पंचायतें हो चुकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को शिकायत दी गई, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।लोगों का आरोप है कि बूचड़खानों से निकलने वाला खून और मल-मूत्र खुले में बहाया जा रहा है, जिससे आसपास के खेतों की उपजाऊ शक्ति कम हो रही है और दुर्गंध के कारण सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है।
- बीमारियों का बढ़ता खतरा
ग्रामीणों के अनुसार, बुचड़खानों के आसपास के गांवों में चर्म रोग तेजी से फैल रहा है। खासकर बच्चे और महिलाएं इसकी चपेट में आ रहे हैं। कई परिवारों का कहना है कि बार-बार दवाइयां लेने के बावजूद बीमारी में सुधार नहीं हो रहा। खुले में फेंके गए अवशेषों पर मक्खियों का जमावड़ा लग जाता है, जो घरों तक पहुंचकर खाने-पीने की वस्तुओं को दूषित कर देती हैं। इससे पेट और त्वचा संबंधी बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं।
- शादियों तक पर असर
ग्रामीणों का कहना है कि दुर्गंध के कारण अब शादी-ब्याह जैसे सामाजिक कार्यक्रमों में लोगों का आना-जाना कम हो गया है। कई स्थानों पर खुले में फैली गंदगी के कारण माहौल असहनीय हो जाता है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन की अनदेखी के चलते स्थिति दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है।
- एनओसी रद्द करने की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि नूंह जिले में बूचड़खानों को दी गई सभी एनओसी तुरंत रद्द की जाएं। साथ ही भविष्य में नए बूचड़खानों को अनुमति न दी जाए। लोगों का कहना है कि जो बूचड़खाने वर्षों से संचालित हो रहे हैं, उन्हें या तो बंद किया जाए या कानून के निर्धारित मानकों के अनुसार संचालित कराया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।