सरकार की गरीब कल्याण योजना के तहत 2011 में बांसवा गांव के 166 गरीब परिवारों को 100-100 वर्ग गज के प्लॉट दिए गए थे। इन प्लॉट्स की रजिस्ट्री तो लाभार्थियों के नाम कर दी गई, लेकिन 13 साल बीत जाने के बाद भी यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ये प्लॉट कहां हैं। उस समय के तत्कालीन सरपंच, ग्राम सचिव और खंड विकास अधिकारी ने न तो जमीन का मुआयना किया और न ही यह तय किया कि लाभार्थियों को कौन-सा प्लॉट मिलेगा। नतीजतन, 13 वर्षों से रजिस्ट्रीधारक अपने हक के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।
अवैध कब्जे और प्रशासन की लापरवाही
कई प्लॉट्स पर अवैध कब्जा होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। पीड़ितों का कहना है कि हर बार सचिवालय में उन्हें सिर्फ आश्वासन दिया जाता है, लेकिन जमीन पर हक दिलाने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। लाभार्थियों ने बताया कि कागज पर प्लॉट मिलने के बावजूद आज तक उन्हें इसका लाभ नहीं मिला। हम गरीब परिवार हैं, हर दिन दिहाड़ी पर काम करते हैं। प्लॉट मिलने की उम्मीद थी कि एक घर बना सकें, लेकिन सिर्फ कागज हाथ में है और जमीन का नामोनिशान नहीं।
13 साल से अटकी इस योजना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द प्लॉट्स पर कब्जा दिलाया जाए और उनके हक की सुरक्षा की जाए। अब बांसवा गांव के गरीब परिवार सरकार और स्थानीय प्रशासन से अपील कर रहे हैं कि उनकी समस्या का समाधान जल्द से जल्द किया जाए ताकि उनका हक अधूरा न रह जाए।