विवाह के साथ ही मृत्यु भोज तथा मिठाई के डिब्बे देने की प्रथा को भी बंद करने पर सहमति दी गई है। महापंचायत की अध्यक्षता गुर्जर सभा हरियाणा के संरक्षक हरिराम चंदीला ने की। उन्होंने बताया कि इस महापंचायत में फरीदाबाद, पलवल, होडल, गुरुग्राम, सोहना और नोएडा समेत विभिन्न क्षेत्रों से आए समाज के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। करीब छह घंटे तक चली चर्चा में विवाह समारोहों में होने वाले अनावश्यक खर्च, दिखावे की परंपराओं और सामाजिक जिम्मेदारियों पर विचार-विमर्श किया गया। पंचायत में गठित 31 सदस्यीय कमेटी ने पलवल की 52 पाल में पहले लिए गए फैसलों की समीक्षा कर उनमें संशोधन किया और नए निर्णय भी तय किए।
बारात और लग्न में लोगों की संख्या निर्धारित
महापंचायत में तय किया गया कि शादी में बारातियों की संख्या 200 तक सीमित रखी जाएगी, जबकि लग्न की रस्म में अधिकतम 31 लोगों को शामिल करने का निर्णय लिया गया। गोद भराई की रस्म को पूरी तरह बंद करने पर भी सहमति बनी। सगाई और अन्य पारिवारिक रस्मों में अनावश्यक भीड़ जुटाने के बजाय सीमित लोगों की भागीदारी पर जोर दिया गया। पंचायत का मानना है कि रस्मों को भव्य बनाने की होड़ में परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ता है, जिसे सामूहिक प्रयासों से कम किया जा सकता है।
महापंचायत में राज्यमंत्री राजेश नागर, गुजरात के पूर्व गृह मंत्री गोवर्धन भाई झडपिया, विधायक मूलचंद शर्मा, पूर्व विधायक शारदा राठौर, कांग्रेस नेता यशपाल नागर, जेपी नागर, विजय प्रताप, बलजीत कौशिक, राकेश भड़ाना, महिपाल आर्य, रणवीर सिंह चंदीला, रणवीर सिंह बिधूड़ी और दीपक चौधरी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।