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Faridabad News: छत पर खुली टंकी बनी बीमारी की जड़, इलाज की जगह मिल रहीं बीमारियां

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बीके अस्पताल में दूषित पानी पीने को मजबूर मरीज, प्रशासन बेखबर
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भारती दुबे
फरीदाबाद। बीके अस्पताल में मरीजों के लिए पीने का पानी ही बीमारी का कारण बनता जा रहा है। अस्पताल की चौथी मंजिल पर बनी पानी की टंकी बिना ढक्कन के खुली पड़ी है, जिससे टंकी में गंदगी और कीड़े-मकोड़ों के गिरने का खतरा बना हुआ है। मरीज और उनके परिजन इसी दूषित पानी को पीने के लिए मजबूर हैं।

अस्पताल से लगातार लापरवाही के मामले सामने आते रहते हैं। मरीज अस्पताल इलाज कराने पहुंचते हैं, लेकिन अस्पताल में मरीज का उपचार नहीं बल्कि उन्हें बीमार किया जा रहा है। मरीजों ने बताया कि टंकी की साफ-सफाई पिछले कई महीनों से नहीं की गई है। टंकी के भीतर गंदगी जमा हो चुकी है। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन पूरी तरह से बेखबर बना हुआ है, या यूं कहें कि अनदेखी का ढोंग कर रहा है। मरीजों का आरोप है कि टंकी पर ढक्कन न होना न केवल लापरवाही है, बल्कि यह सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा दूषित पानी मरीजों की सेहत के लिए गंभीर खतरा है। इससे पेट से जुड़ी बीमारियों के साथ-साथ त्वचा संक्रमण, उल्टी-दस्त, टाइफाइड जैसी कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। जो मरीज इलाज कराने आए हैं, वो यहां और अधिक बीमार हो सकते हैं।
गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. राम चंद्र सोनी ने बताया कि दूषित पानी से बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। विशेष रूप से छोटे बच्चे और बुजुर्ग इस खतरे की जद में जल्दी आ जाते हैं, क्योंकि उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली अपेक्षाकृत कमजोर होती है। ऐसी लापरवाही आगे चलकर मरीजों के लिए घातक साबित हो सकती है। प्रशासन को चाहिए कि स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करें और नागरिकों को जागरूक करें। साफ पानी न सिर्फ जीवन का आधार है, बल्कि स्वस्थ समाज की नींव भी है।
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इसको लेकर जानकारी नहीं है। यदि पानी की टंकियों पर ढक्कन नहीं है तो इसको लेकर जांच की जाएगी। कुछ पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।- डॉ. विकास गोयल, एसएमओ
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