संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। शहर में जगह-जगह सीवर के मैनहोल खुले हुए देखने को मिल रहे हैं, जो लगातार हादसों का कारण बन रहे हैं। इन खुले मैनहोल व निगम द्वारा विकास के नाम पर खोदे गए गड्ढों में गिरकर लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। बावजूद नगर निगम के अधिकारी टूटे हुए मैनहोल पर ढक्कन लगाने और खोदे गए गड्ढों को कवर करने का काम समय रहते नहीं करते हैं। करोड़ों रुपये का बजट सीवर के मैनहोल के लिए आता है, इसके बावजूद नगर निगम के लापरवाह अधिकारी लोगों को इन टूटे सीवर के ढक्कनों में मरने के लिए छोड़ देते हैं।
शहर में निगम अधिकारियों की लापरवाही से लगातार इस प्रकार के हादसे हो रहे हैं, जिनमें लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। करीब 15 दिन पहले भड़ाना चौक पर नगर निगम व अन्य संबंधित विभागों द्वारा करीब तीन से चार फीट गहरे बनाए गए नाले में गिरकर एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। निगम द्वारा खोदे गए इस नाले के ऊपर स्लैब नहीं रखा गया था, ऐसे में नाले से पानी ओवरफ्लो होकर आसपास की सड़कों पर फैल गया। इससे पैदल चलने के दौरान लोगों को सड़क और खुले नाले का आभास नहीं हो पाया। साथ ही रात को सड़क पर अंधेरा छाया रहता है। ऐसे में देर रात मृतक को पैदल चलने के दौरान नाले का आभास नहीं हुआ और उसका पैर खुले नाले में फिसल गया, जिससे उसकी मौत हो गई। मृतक की पहचान नहीं हो पाई थी, लेकिन घटना के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई। 28 जून, 2023 को कुरैशीपुर में ट्रैक्टर-ट्राली संतुलन बिगड़ने के चलते नाले में जा गिरा। जिसमें ट्रैक्टर पर बैठे तालीम नामक व्यक्ति की मौत हो गई थी। 6 नवम्बर, 2022 को एयरफोर्स रोड पर खुले सीवर के मैनहाेल में गिरने से एक 11 वर्षीय बच्चे कुणाल की मृत्यु हो गई थी, जोकि अपने घर के पास खेल रहा था। बच्चे की मौत को लेकर शहर के समाजसेवियों ने प्रदर्शन भी किया था। जिसके बाद नगर निगम के एसडीओ, जेई और पार्षद के खिलाफ मुकद्दमा भी दर्ज किया गया था। 20 मई, 2022 को आईपी कॉलोनी के सामने खुले नाले में गिरकर एक अज्ञात व्यक्ति की मौत हो गई थी। यह नाला बारिश के पानी की निकासी के लिए बनाया गया था। इससे पूर्व कई जानवर भी इस खुले नाले में गिर चुके हैं।
जब तक संबंधित विभाग के दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी, इस प्रकार के हादसे होते रहेंगे। पुलिस भी लोगों के दबाव में मामले तो दर्ज कर लेती है, लेकिन दोषी अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
- संतोष यादव, समाजसेवी
फरीदाबाद शहर में करोड़ों रुपये सीवर के ढक्कनों के लिए आते हैं, बावजूद इसके शहर में जगह-जगह सीवर के टूटे ढक्कन हादसों का कारण बन रहे हैं। राइट टू सर्विस एक्ट के तहत 2 दिन के अंदर टूटे ढक्कन शिकायत के बाद बदले जाने चाहिए और अगर ऐसा नहीं होता है तो जुर्माने का प्रावधान है।
- अजय सैनी, आरटीआई एक्टिविस्ट