संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। ऑपरेशन के दौरान मरीज को बेहोश करने में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन (एनेस्थीसिया) की ओवरडोज से ईएसआईसी के नर्सिंग स्टाफ राजकुमार (31) की मौत हो गई। वह एनआईटी-तीन स्थित ईएसआईसी मेडिकल काॅलेज में कार्यरत था। शव एनआईटी-तीन स्थित उसके कमरे में पड़ा था। मौके पर उसके एक हाथ में सिरिंज मिली है। प्राथमिक जांच में पता चला है कि जिस हाथ में इंजेक्शन लगा था वह लाल हो गया था।
राजस्थान के चूरू स्थित ब्राह्मणका वास निवासी राजकुमार एनआईटी-तीन में किराये के कमरे में अकेला रहता था। बुधवार को नाइट शिफ्ट कर वह अपने कमरे पर चला गया। बृहस्पतिवार दोपहर कमरे में सफाई के लिए गई सहायिका ने देखा कमरे का दरवाजा खुला हुआ है और राजकुमार का शव फर्श पर पड़ा हुआ था। एनआईटी तीन चौकी प्रभारी संजय कुमार ने बताया विसरा लैब में जांच के लिए भेजा गया है। कमरे में पुलिस को सुसाइड नोट नहीं मिला है।
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कमरे में मिली दवा की खाली शीशी
पुलिस को राजकुमार के घर में एक खाली शीशी मिली। जांच में पता लगा यह दवा ऑपरेशन के दौरान मरीज को बेहोश करने के लिए दी जाती है। राजकुमार के दाएं हाथ में सिरिंज थी, जिसमें आधा इंजेक्शन बचा हुआ था। पोस्टमार्टम के दौरान सामने आया राजकुमार ने बाएं हाथ में इंजेक्शन लगाया था। उसके हाथ पर पहले से भी इंजेक्शन लगाने के निशान बने हुए थे। माना जा रहा है कि दवा के कारण ही राजकुमार की मौत हो गई।
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घर तक कैसे लाता था दवा
नर्स के घर पर मिली एनेस्थीसिया दवा की शीशी से कई सवाल उठ रहे हैं। अस्पताल के स्टाफ नर्स को इतनी आसानी से बेहोशी की दवा कैसे मिल जाती है, क्या इसका कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता है। उसके बांह पर पहले से कई इंजेक्शन के मिले निशान से क्या प्रतीत होता है कि कहीं वह नशे के लिए इसका प्रयोग तो नहीं करता था। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि हो सकता है उसको बेहोशी की दवा का ओवरडोज किसी और ने तो नहीं दिया।
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कम डोज लेने पर नशा जैसा हो सकता है प्रतीत
फरीदाबाद। ईएसआईसी अस्पताल में स्टाफ नर्स राजकुमार ने इंजेक्शन के माध्यम से जिस दवा का इस्तेमाल किया है, उसकी सीमित मात्रा नशे जैसा प्रतीत कराती है। ईएसआईसी मेडिकल कालेज के डिप्टी डीन डॉ. एके पांडेय ने बताया, राजकुमार उनके यहां नर्सिंग विभाग में था। उसने जिस दवा का सेवन किया है उसकी अतिरिक्त मात्रा किसी के लिए भी प्राण घातक हो सकती है।
दवा का इस्तेमाल ऑपरेशन के दौरान मरीज को बेहोश करने के लिए किया जाता है। इसे एनेस्थेटिक डॉक्टर मरीज की उम्र, आपरेशन में लगने वाला समय, मेडिकल हिस्ट्री, बीपी और शरीर के वजन आदि की जांच के बाद लगाता है। इसके बाद भी इस दवा के साथ कुछ अन्य दवाएं मिलाई जाती हैं, ताकि मरीज के शरीर पर नकारात्मक प्रभाव ना पड़े। राजकुमार इस दवा की मात्रा कम रखता तो शायद उसकी जान बच सकती थी। उसे केवल नशे जैसा प्रतीत होता। हो सकता है वह बेहोश हो जाता और सही समय पर इलाज मिलने पर उसकी जान बच जाती। संवाद