खुले मैदान की बजाय होटल व रेस्त्रां में मनाया जाने लगा है त्योहार
हेमलता रावत
फरीदाबाद। फरीदाबाद में बड़ी संख्या में पंजाबी समुदाय के लोग रहते हैं। जिसके चलते शहर में जमकर लोहड़ी मनाई जाती है। हालांकि, अब ढोल-नगाड़ों की जगह डीजे के गीतों ने ले ली है। एनआईटी-5 निवासी बुजुर्ग जसमीत कौर बताती हैं कि पहले त्योहार में लोग आग जलाकर उसकी परिक्रमा करते थे और उसमें गुड़, मूंगफली, रेवड़ी, गजक, पॉपकॉर्न डालते थे। इसके बाद सभी लोग साथ में ढोल-नगाड़ों पर नाच-गाना करते थे और एक-दूसरे को त्योहार की बधाइयां देते थे। आज के समय में त्योहार पार्टी के रूप में मनाया जाने लगा है। अब लोहड़ी का त्योहार किसी गांव या खुले मैदान की बजाय होटल व रेस्त्रां में मनाया जाने लगा है। जिसमें दोस्त व परिवार के लोग ढोल-नगाड़ों की बजाय डीजे पर डांस करते हुए नजर आते हैं।
सेक्टरों और सोसाइटियों में मनाया जाएगा त्योहार
आगमन सोसाइटी की आरडब्ल्यूए के प्रधान अंकित त्यागी ने बताया कि उनकी सोसाइटी में हर साल लोहड़ी का त्योहार मनाया जाता है। सोमवार को लोहड़ी के त्योहार के दिन सभी सोसाइटी के लोग एक साथ मिलकर त्योहार मनाएंगे। इसको लेकर उनकी ओर से पार्क के बीचों बीच आग लगाई जाएगी। उसके बाद उस आग के चारों ओर नवविवाहित जोड़े और बच्चे की पहली लोहड़ी वाले परिवार के लोग फेरे लगाएंगे। उसके बाद डीजे और ढोल की थाप पर डांस किया जाएगा। इसके अलावा जिले की करीब 40 से अधिक सोसाइटी व कॉलोनियों में भी इस त्योहार को धूमधाम से मनाया जाएगा।
शहर के रेस्त्रां और होटल हुए बुक
एनआईटी-3 निवासी प्रीतम ने बताया कि उनके ब्लाॅक के निवासियों ने इसी सेक्टर में एक होटल बुक कर रखा है। यहां सभी परिवार इकट्ठा होकर लोहड़ी मनाएंगे। एनआईटी-5 स्थित रेस्त्रां मालिक हृदयेश ने बताया कि उनके पास एक माह पहले ही इस तिथि के लिए बुकिंग हो गई थी। वह यहां पर रात का खाने का इंतजाम करते हैं। वहीं, रेस्त्रां के बाहर आग जलाकर लोहड़ी मनाने का इंतजाम किया जाता है।
अब लोहड़ी मांगने नहीं जाते बच्चे
पहले लोहड़ी के दिन शाम को सूर्य ढलने के बाद धूमधाम से लोहड़ी जलाई जाती थी। इससे पहले घर के छोटे बच्चे आस पड़ोस में लोहड़ी मांगने के लिए जाते थे लेकिन अब ऐसा देखने को नहीं मिलता है। क्योंकि अब बच्चों को शर्म लगती है। वासुदेव अरोड़ा, पंजाबी फेडरेशन फरीदाबाद के अध्यक्ष
पार्टी ने ले लिया रूप
पहले लोहड़ी का त्योहार गांव में व गली में एक साथ मनाया जाता था लेकिन अब इस त्योहार को घर की बजाय होटल व रेस्तरां में मनाया जाने लगा है। इस दौरान लोग पार्टी करते हुए नजर आते हैं। पहले परंपरा के तौर पर त्योहार को मनाया जाता था लेकिन अब यह औपचारिकता के तौर पर मनाया जा रहा है। -प्रेम खट्टर, पंजाबी समाज सेवा समिति के अध्यक्ष