फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

घर टूटने के बाद भी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं

विज्ञापन
फरीदाबाद खोरी गांव में तोड़फोड़ करती नगर निगम की टीम । - फोटो : Faridabad
विज्ञापन
फरीदाबाद। खोरी गांव में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर तोड़फोड़ कार्रवाई लगातार जारी है। मंगलवार को भी गांव में निगम की ओर से भारी तोड़फोड़ की गई। इसके बावजूद लोग अपनी जमीन को छोड़कर जाने के लिए तैयार नहीं है। बेघर होने के बाद कई लोग अभी भी टैंट और तंबू लगाकर रह रहे हैं। उनका कहना है कि मर जाएंगे लेकिन खून पसीने की कमाई से खरीदी जमीन छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे।
विज्ञापन

खोरी में बेघर हुए लोगों के लिए प्रशासन की ओर से राधा स्वामी सत्संग आश्रम में अस्थायी राहत शिविर लगाया गया है। यहां दिन में कुछ लोग भोजन करते है, लेकिन रात में खाली रहता है। यहां चुनिंदा लोग ही रुकते हैं। यही स्थिति रात के समय होती है। रात में लोग भोजन के बाद फिर से अपने मकानों की जगह पर चले जाते हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने यह जमीन जीवनभर की पूंजी देकर खरीदी हैं। एक-एक पैसा जोड़कर किसी प्रकार घर बनवाया था। अब प्रशासन ने एकाएक बिना कहीं दूसरी जगह मकान दिए उनके घरों को तोड़ दिया हैं। ऐसे में यदि वे अपनी जमीन भी छोड़ देंगे तो कहीं के नहीं रहेंगे।
अस्थायी राहत शिविर के संचालक रेडक्रॉस सोसाइटी सचिव विकास कुमार ने बताया कि लोगों को समझाया जा रहा है कि वे रात में राहत शिविर में आकर रहें। यहां शौचालय, नहाने और खाने की पूरी व्यवस्था की गई है, लेकिन वे खाना खाने के बाद शिविर में नहीं रुकते हैं। वे टूटे मकानों की जगह पर ही पन्नी, प्लास्टिक या तिरपाल लगाकर रात काटते हैं। अधिकांश लोगों ने अपने परिवार तो दूसरी जगह किराये पर शिफ्ट कर दिए हैं, लेकिन कई लोग अभी भी जमीन पर कब्जा जमाए हुए हैं।
विज्ञापन

खोरी निवासी लौकेश, वरूण और सौरभ शस्त्री ने बातया कि एक-एक पैसा जोड़कर मकान बनाया था। तीन से साढ़े चार लाख रुपये में जमीन खरीदी। लाखों रुपये मकान बनाने में लगा दिए। प्रशासन को भू-माफिया के नाम बता दिए हैं। सरकार जमीन की कीमत दे या हमें दूसरी जगह मकान दे तो हम चले जाएंगे। प्रशासन ने मकान गिरा दिया। बच्चों को किराये के मकान में दिल्ली लालकुंआ क्षेत्र में रखा है, लेकिन जमीन तब तक नहीं छोड़ेंगे, जब तक जमीन की कीमत नहीं मिलेगी।
-----
हजारों बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
लोगों ने बताया कि स्कूल खुल गए है। वहीं ऑनलाइन पढ़ाई चल रही है। सुनीता ने बताया कि एक माह से बच्चे की पढ़ाई बाधित हो रही है। बिजली न होने से ऑनलाइन पढ़ाई नहीं हो पा रही है। दूसरा घर टूट जाने के बाद सभी हताश हो गए हैं। बारिश में अब सिर छिपाने के लिए जगह नहीं है।
सुंदर ने बताया कि बेटा दिल्ली के सरकारी स्कूल में नौवीं में पढ़ता है। घर टूटने से हर तरफ से मार झेलनी पड़ रही है। काम पर नहीं जाने से परिवार चलाने में परेशानी हो रही है। बच्चे को ट्यूशन लगवाया था। अब तोड़फोड़ के कारण बंद हो गई है। हजारों बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। हमारी बात को कोई नहीं सुन रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें