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Faridabad News: दिल की बीमारियों के साथ जन्म ले रहे हाइपरटेंशन वाली माताओं के नवजात

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संवाद न्यूज एजेंसी
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फरीदाबाद। मधुमेह और उच्च रक्त चाप से ग्रसित गर्भवतियों के होने वाले नवजात दिल से जुड़ी बीमारियों के साथ जन्म ले रहे हैं। गर्भावस्था के दौरान होने वाले मधुमेह और उच्च रक्तचाप की शिकायत से बच्चों में दिल से संबंधित बीमारियों में नसें उल्टी होना, बच्चे का नीले रंग का पैदा होना, दिल में छेद और चेंबर की बनावट में विकृत के अलावा नसों के सिकुड़ने जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। शहर के जिला अस्पताल समेत कई निजी अस्पतालों में लगभग 20 फीसदी मामले पाए जा रहे हैं।

जिला अस्पताल में प्रत्येक माह करीब 700 से 800 गर्भवतियों की डिलीवरी की जाती है। यहां जन्म लेने वाले 100 बच्चों में से 15 से 16 बच्चे दिल से जुड़ी समस्याओं से ग्रसित होकर जन्म ले रहे हैं। हालांकि अस्पताल में बच्चों के दिल से जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए कोई संस्थान उपलब्ध न होने के कारण उन्हें आयुष्मान के तहत निजी अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है।
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गर्भावस्था के दौरान पहले मां की स्क्रीनिंग की जाती है। इसके बाद अगर गर्भवतियों में शुरुआती तीन महीनों में उक्त रक्त चाप या फिर मधुमेह बढ़ने की समस्या पाई जाती है तो अस्पताल में ऐसे मामलों को लिया ही नहीं जाता। इन मामलों को दिल्ली सफदरजंग अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है। हाइपरटेंशन और मधुमेह का सीधा असर बच्चे के दिल और दिमाग पर पड़ता है। इसके बावजूद भी नवंबर माह में अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों में पांच बच्चे जबकि दिसंबर में मात्र नौ और जनवरी माह में कुछ तीन मामलों को पंजीकृत किया गया। हालांकि विशेषज्ञों के मुताबिक इन मामलों में केवल दो या तीन प्रतिशत ही बच्चे ही मां में होने वाली बीमारियों से प्रभावित पाए गए। -स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ अरूण, जिला अस्पताल



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सेक्टर-8 स्थित सर्वोदय अस्पताल में भी दिल से जुड़ी समस्याओं का आंकड़ा सामने आ रहा है। हालांकि विशेषज्ञों के मुताबिक केवल मां में उच्च रक्तचाप या मधुमेह ही बच्चों में दिल की बीमारियों की मुख्य वजह नहीं है, बल्कि खान-पान और लाइफ स्टाइल को भी इसके लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। उनका कहना है कि रोजाना करीब तीन से चार बच्चे इस प्रकार की समस्या के साथ जन्म ले रहे हैं।- डॉ. राजन मोदी, ह्रदय रोग विशेषज्ञ
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सेक्टर-16 स्थित मैरिंगों एशिया अस्पताल में रोजाना दिल से जुड़ी बीमारियों से ग्रसित चार से पांच मामले सामने आ रहे हैं। अस्पताल में रोजाना की जाने वाली लगभग दस डिलीवरी में से करीब एक या दो बच्चे मां में पाई जाने वाली बीमारियों से प्रभावित पाए जाते हैं। यह एक चिंता का विषय बन रहा है।- डाॅ.मनीषा, स्त्री रोग विशेषज्ञ
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