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Faridabad News: लापरवाही ने ली दो सफाईकर्मियों की जान, पहले हुए हादसों से भी नहीं लिया सबक

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मशीनी सफाई के बड़े-बड़े दावों के बीच अब भी बेल्ट के भरोसे जहरीले टैंकों में उतर रहे कर्मचारी
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बिना गैस डिटेक्शन और रेस्क्यू सिस्टम के उतारना गंभीर चूक
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। जीवन नगर स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में दो सफाई कर्मचारियों की दर्दनाक मौत ने एक बार फिर प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के अंतर को उजागर कर दिया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कर्मचारी एसटीपी के अंदर लगी जाली (स्क्रीन) की सफाई करने के लिए उतरे थे। बताया जा रहा है कि एक कर्मचारी महज जंजीर और सुरक्षा बेल्ट के सहारे नीचे गया था जबकि टैंक के भीतर जानलेवा गैस मौजूद थी। मानकों को दरकिनार कर कर्मी को अंदर उतारने के इस मामले ने सीधे तौर पर सुरक्षा प्रबंधन को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
औद्योगिक सुरक्षा विशेषज्ञों और कानूनी जानकारों के अनुसार किसी भी कर्मचारी को केवल एक सेफ्टी बेल्ट के भरोसे गहरे व बंद टैंक में उतारना नियमों का खुला उल्लंघन है। किसी भी कन्फाइंड स्पेस (बंद जगह) या एसटीपी टैंक में प्रवेश करने से पहले कई चरणों वाली अनिवार्य सुरक्षा प्रक्रिया का पालन करना होता है। यदि इनमें से एक भी कदम चूक जाए तो जहरीली गैस महज कुछ सेकंड में जान ले लेती हैं।
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यह हैं सुरक्षा के कड़े नियम
जानकारों के अनुसार नियमों के तहत किसी भी कर्मचारी को टैंक में उतारने से पहले कई प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य है जिसमें गैस डिटेक्शन टेस्ट, जबरन वेंटिलेशन, फुल बॉडी हार्नेस, इमरजेंसी बैकअप जरूरी है। किसी भी कर्मचारी को अंदर उतारने के लिए सबसे पहले गैस डिटेक्टर मशीन से टैंक के अंदर ऑक्सीजन के स्तर, मीथेन, कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी घातक गैसों की जांच जरूरी है। इसके बाद ब्लोअर या वेंटिलेशन सिस्टम के जरिये टैंक के भीतर की जहरीली हवा बाहर निकालकर ताजी हवा पहुंचाई जाती है। वहीं कर्मचारी को सिर्फ नॉर्मल बेल्ट नहीं बल्कि फुल बॉडी हार्नेस और लाइफलाइन दी जानी चाहिए। इसके साथ ही मौके पर ट्राइपॉड रेस्क्यू सिस्टम, ऑक्सीजन सिलेंडर और एक प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम का मुस्तैद रहना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
ठेकेदारों की मनमानी और अधिकारियों की चुप्पी
अक्सर देखा गया है कि नगर निगम और अन्य संबंधित विभाग सीवर या एसटीपी के संचालन का ठेका निजी कंपनियों को देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। लेकिन कानूनन, मुख्य नियोक्ता होने के नाते सरकारी विभागों के अधिकारियों की यह नियमित जिम्मेदारी है कि वे कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों की निगरानी करें। आरोप लगते रहे हैं कि निजी ठेकेदार चंद पैसे बचाने और अपनी लागत कम करने के लिए सुरक्षा उपकरणों, कर्मियों के प्रशिक्षण और रेस्क्यू मॉकड्रिल पर खर्च नहीं करते जिसका खामियाजा गरीब कर्मियों को जान देकर चुकाना पड़ता है।

मशीनीकरण के दावों की खुली पोल
सरकार और स्थानीय निकायों द्वारा समय-समय पर यह दावा किया जाता है कि फरीदाबाद में सीवर और एसटीपी की सफाई को पूरी तरह मशीनीकृत किया जा रहा है ताकि किसी भी इंसान को मैनहोल या खतरनाक टैंक में न उतरना पड़े। इसके बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि आज भी मैन्युअल तरीके से काम लिया जा रहा है।

सेक्टर-84 के हादसे से भी नहीं सीखा सबक
फरीदाबाद में इस तरह का यह पहला हादसा नहीं है। इससे एक माह पहले मई में सेक्टर-84 में भी सीवर की सफाई के दौरान दो कर्मचारियों की दम घुटने से मौत हो चुकी है। लगातार हो रहे ये हादसे यह साफ संकेत देते हैं कि हर दुर्घटना के बाद जांच कमेटियां तो बनती हैं लेकिन धरातल पर सुधार शून्य रहता है। सफाई यूनियनों का कहना है कि जब तक ठेकेदारों और दोषी अधिकारियों पर सीधे आपराधिक मुकदमा दर्ज कर जवाबदेही तय नहीं होगी और हर साइट का स्वतंत्र सेफ्टी ऑडिट नहीं होगा तब तक ऐसे मामलों को रोकना मुमकिन नहीं होगा।

विदेशी विकास की तर्ज पर सुरक्षा तकनीक क्यों नहीं
एक तरफ जहां सड़कों, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्मार्ट सिटी के लिए यूरोप, अमेरिका और जापान जैसी विदेशी तकनीकों का उदाहरण दिया जाता है वहीं श्रमिक सुरक्षा के मामले में वैश्विक मानकों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। विकसित देशों में किसी भी कन्फाइंड स्पेस में एंट्री के लिए बाकायदा वर्क परमिट जारी होता है और बिना रोबोटिक या मशीनी असिस्टेंस के किसी को अंदर जाने की इजाजत नहीं होती।
अधिकारी नहीं दे रहे जवाब

इस मामले को लेकर जब नगर निगम के अधीक्षक अभियंता ओमवीर से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया वहीं इस मामले को चीफ इंजीनियर विवेक गिल से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उनकी तरफ से भी कॉल का जवाब नहीं दिया गया।


लगातार हादसों के बावजूद सरकार को ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है। गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ाई जा रही है। दो सीवर मैन की मौत के जिम्मेदारों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने के साथ मृतक आश्रितों को एक एक करोड़ आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को पक्की नौकरी मिलनी चाहिए। - सुभाष लांबा, राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ
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जीवन नगर स्थित एसटीपी में दो कर्मचारियों की मौत के मामले में अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना की है। सुप्रीम कोर्ट की गाइंड लाइन्स के अनुसार सफाई कार्य करते समय मौके पर अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य है। पुलिस को इस मामले में एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उन्हें सुप्रीम कोर्ट के अनुसार तय मुआवजा देना चाहिए नहीं तो संघ आंदोलन करेगा। - नरेश कुमार शास्त्री, राज्य प्रधान नगर पालिका कर्मचारी संघ हरियाणा
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