फरीदाबाद जेल इतिहास में यह पहली बार
जेल प्रबंधन के अनुसार, फरीदाबाद जेल के इतिहास में यह पहली बार हुआ है। किसी बंदी के बच्चे को स्कूल भेजने के लिए बस सीधे जेल के मुख्य द्वार तक पहुंचेंगी। बच्चे की मां उसके भविष्य और शिक्षा को लेकर लगातार चिंतित थी। उसने जेल प्रशासन से अपने बेटे का स्कूल में दाखिला कराने के लिए गुहार लगाई थी। जेल अधिकारियों ने इस पर गंभीरता से विचार किया। उन्होंने बच्चे की शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी उठाने का निर्णय लिया। यह निर्णय बच्चे के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
शिक्षा का पूरा खर्च जेल प्रशासन उठाएगा
बच्चे को प्रतिदिन स्कूल ले जाने और छुट्टी के बाद वापस लाने के लिए बस जेल के मुख्य द्वार तक आएगी। बच्चे की स्कूल फीस का पूरा खर्च जेल प्रशासन द्वारा वहन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, बच्चे की यूनिफॉर्म, किताबों और स्टेशनरी का पूरा खर्च भी जेल प्रशासन ही उठाएगा। इस पहल से बच्चे को बिना किसी बाधा के अपनी पढ़ाई जारी रखने में मदद मिलेगी।
बच्चों के शिक्षा के अधिकार का सम्मान
वर्तमान में नीमका जेल में कुल छह बच्चे अपनी माताओं के साथ रह रहे हैं। जेल नियमानुसार, छह साल की उम्र तक बच्चे अपनी मां के साथ जेल में रह सकते हैं। छह साल पूरे होने के बाद उन्हें उनके परिजनों या शेल्टर होम के सुपुर्द कर दिया जाता है। जेल अधीक्षक नरेश गोयल ने इस मानवीय पहल के पीछे की सोच स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि महिला अपने अपराध की सजा काट रही है, लेकिन मासूम को शिक्षा के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। इसी सोच के साथ बच्चे की पढ़ाई और स्कूल आने-जाने की पूरी व्यवस्था की गई है।