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मिड-डे-मील वर्करों ने मांगें मनवाने के लिए किया प्रदर्शन

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फरीदाबाद। मिड-डे-मील वर्करों ने मांगों व शिकायतों पर संज्ञान दिलाने के लिए बुधवार को जिला शिक्षा विभाग के कार्यालय पर प्रदर्शन किया। इस दौरान निदेशक के नाम सात सूत्रीय ज्ञापन भी स्थानीय अधिकारियों के माध्यम से भेजा। यूनियन की जिला प्रधान कमलेश ने बताया कि सीटू के जिला उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह डंगवाल और हरियाणा गवर्नमेंट पीडब्ल्यूडी मेकेनिकल वर्कर्स यूनियन के जिला कोषाध्यक्ष पूर्ण दहिया, आशा देवी, पूनम, और सरोज भी इस दौरान उपस्थित रहे।
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वीरेंद्र सिंह डंगवाल ने बताया कि वर्करों को पिछले पांच महीने से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। सरकार वर्करों के साथ भेदभाव कर रही है। एक तरफ जहां शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को वर्ष के 12 महीने वेतन दिया जाता है, वहीं मिड=डे-मील वर्कर्स को केवल 10 महीने का मानदेय ही मिलता है। उन्होंने इन कर्मचारियों को भी वर्ष के 12 महीने वेतन देने की मांग की। उन्होंने बताया कि बकाया वर्दी भत्ता जारी नहीं किया गया है।
इस राशि में बढ़ोतरी होनी चाहिए। सरकार के द्वारा साल भर में दो ड्रेस के लिए केवल 600 रुपये दिए जाते हैं। इस महंगाई में 600 रुपये में एक भी ड्रेस नहीं बनती है इसलिए दो ड्रेस के लिए एक वर्ष में कम से कम 1200 रुपये मिलने चाहिए। उन्होंने कहा कि मिड-डे-मील वर्करों की 60 साल की आयु में सेवानिवृत्त करने के बजाए इनको 65 साल तक की उम्र तक काम करने की अनुमति मिलनी चाहिए, जैसा कि आंगनबाड़ी आईसीडीएस परियोजना में कार्यरत आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर की सेवानिवृत्ति की उम्र 65 साल है। हेल्पर्स का भी बच्चों के लिए राशन बनाने का काम है। ईएसआई पीएफ की सुविधा सहित सभी सामाजिक सुरक्षा लाभ देने की मांग की। उन्होंने बताया कि मिड-डे-मील वर्करों को भी प्राथमिकता के आधार पर कोरोना वैक्सीन मुफ्त में दी जाए।
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