फरीदाबाद। दो लाख के इनामी बदमाश मनोज मांगरिया को क्राइम ब्रांच (ऊंचा गांव) ने बुधवार को बड़ी आसानी से अपनी गिरफ्त में ले लिया। यह बात लोगों के गले नहीं उतर रही। पुलिस महकमे में मामले की चर्चा बड़ी जोरों पर है। उधर, पीड़ित पक्ष ने भी इस बात को लेकर बुधवार रात को पुलिस आयुक्त कार्यालय पर हंगामा किया। मृतक के परिजनों का आरोप है कि मांगरिया ने योजना के साथ आत्मसमर्पण किया। वहीं, मांगरिया को पकड़ने के बाद पुलिस द्वारा बताई गई कहानी के तथ्य भी कमजोर नजर आ रहे हैं।
पुलिस के अनुसार मांगरिया एक टैक्सी किराए पर लेकर अपनी बहन से मिलने बुढेना गांव पहुंचा था। रास्ते में क्राइम ब्रांच ने उसे रोक लिया। पुलिस की गाड़ी देखकर वह टैक्सी से उतरकर भागा और मौके पर पुलिस ने उसे दबोच लिया। ऐसे में पुलिस की कहानी कई पहलुओं में सवालिया नजर आ रही है। दरअसल मनोज मांगरिया दो लाख का ईनामी है। वह लोकेशन ट्रेस होने से बचाने के लिए अपने साथ मोबाइल फोन तक नहीं रखता। ऐसे में वह बिना किसी हथियार के किराए की गाड़ी में बैठकर बेखौफ स्थानीय इलाके में घूमता हुआ पकड़ा गया।
डीसीपी क्राइम पर गिरी गाज
मांगरिया की गिरफ्तारी असली है या उसने आत्मसमर्पण किया है। इस पर पुलिस कुछ बोलने को तैयार नहीं है, लेकिन उसकी गिरफ्तारी के कुछ घंटों बाद ही डीसीपी क्राइम मुकेश मल्होत्रा को उनके पद से हटा दिया गया। अब डीसीपी बल्लभगढ़ सुमेर सिंह को अपराध का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। पुलिस आयुक्त इसे रूटीन प्रक्रिया कह रहे हैं, जबकि पुलिस महकमा इसे मांगरिया से जोड़कर देख रहा है।