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Faridabad News: अरावली की मांगर बनी को मिलेगा पवित्र वन का दर्जा

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दुर्लभ और विलुप्ति की ओर बढ़ रही प्रजातियों के पेड़ों को संरक्षित करने के लिए विशेष कदम उठाए जाएंगे
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वन विभाग ने विकसित करने का प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजा
प्राकृतिक सुंदरता के साथ क्षेत्र के इतिहास और पर्यावरणीय महत्व की जानकारी मिलेगी


संवाद न्यूज एजेंसी

फरीदाबाद। अरावली की गोद में बसी मांगर बनी को प्रकृति पर्यटन और जैव विविधता संरक्षण के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। वन विभाग ने इसे पवित्र वन के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजा है। योजना के तहत यहां वन पथ, सूचना बोर्ड और संरक्षण संबंधी सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे पर्यटकों को प्राकृतिक सुंदरता के साथ क्षेत्र के इतिहास और पर्यावरणीय महत्व की जानकारी भी मिल सकेगी।

मांगर बनी अरावली क्षेत्र के उन चुनिंदा वन क्षेत्रों में शामिल है जहां सैकड़ों वर्ष पुराने पेड़ आज भी मौजूद हैं। प्रस्ताव के तहत दुर्लभ और विलुप्ति की ओर बढ़ रही प्रजातियों के पेड़ों को संरक्षित करने के लिए विशेष कदम उठाए जाएंगे। इन पेड़ों के पास सूचना बोर्ड लगाए जाएंगे, जिन पर उनकी विशेषताओं और पर्यावरणीय महत्व की जानकारी होगी। इससे लोगों में वन संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
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प्राकृतिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

दिल्ली-एनसीआर से बड़ी संख्या में लोग मांगर बनी की हरियाली और शांत वातावरण का अनुभव करने पहुंचते हैं। प्रस्ताव के अनुसार यहां वन पथ विकसित किया जाएगा ताकि पर्यटक सुरक्षित तरीके से वन क्षेत्र का भ्रमण कर सकें। पक्षियों की विभिन्न प्रजातियां, प्राचीन वृक्ष और प्राकृतिक वातावरण इस क्षेत्र को ईको टूरिज्म के लिए आकर्षक बनाएंगे। वन विभाग का मानना है कि इससे क्षेत्र की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी।

आस्था और विरासत को मिलेगा संरक्षण

मांगर बनी केवल प्राकृतिक धरोहर ही नहीं बल्कि स्थानीय लोगों की आस्था का भी प्रमुख केंद्र है। ग्रामीणों की मान्यता है कि यहां तपस्या करने वाले संत गूदड़िया दास बाबा का आशीर्वाद इस वन क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। इसी कारण लोग यहां के पेड़-पौधों को नुकसान नहीं पहुंचाते। प्रस्ताव के तहत वन क्षेत्र की चहारदीवारी कर अवैध अतिक्रमण और निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाने की योजना है, जिससे इस ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत का दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित हो सके।
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मांगर बनी को पवित्र वन बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है। स्वीकृति मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस पहल से पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और स्थानीय आस्था तीनों को मजबूती मिलेगी।
-झलकार उयके, जिला वन अधिकारी
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