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Faridabad News: मधुबनी पेंटिंग लोककला और संस्कृति को कर रही प्रदर्शित

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संवाद न्यूज एजेंसी
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बल्लभगढ़। 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले में बिहार की मधुबनी पेंटिंग वहां की लोक कला व संस्कृति को प्रदर्शित कर रही है। मेले में आए मधुबनी कलाकार अंकित कुमार ने बताया कि पेंटिंग बनाने के लिए पहले हाथ से कागज तैयार किया जाता है और फिर उस पर पेंटिंग की जाती है। पेंटिंग बनाने के लिए प्राकृतिक रंगों का प्रयोग किया जाता है। अंकित के अनुसार एक पेंटिंग बनाने में एक महीने तक का समय लग जाता है। उन्होंने अपनी स्टॉल पर रामायण, महाभारत और प्रकृति से संबंधित कलाकृतियों को प्रदर्शित किया है।

उनकी स्टॉल पर 25 रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक की कलाकृतियां मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि उनकी नानी निर्मला देवी ने इस मेले में आना शुरू किया था। उसके बाद उनकी मां ममता देवी आईं। अब वह आ रहे हैं। उनकी तीसरी पीढ़ी आ रही है। उन्होंने बताया कि उनकी मां को नेशनल अवॉर्ड मिला है। वहीं उनकी नानी को स्टेट अवार्ड मिला है।
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उन्होंने बताया कि उनकी पेंटिंग में जिस कागज का इस्तेमाल किया जाता है उस कागज को वह खुद बनाते हैं। जिसमें कागज के साथ रूई भी होती है। कागज को बनाने के बाद उसके ऊपर प्राकृतिक रंग से पेंटिंग किया जाता है। वह करीब 20 साल से इस मेले में आ रहे हैं। उनकी पेंटिंग को लोग काफी पसंद करते है।
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अलग तरह का होता है कागज

उन्होंने बताया कि उनकी पेंटिंग में जिस कागज का इस्तेमाल किया जाता है उस कागज को वह खुद बनाते है। जिसमें कागज के साथ रूई भी होती है। उस कागज को बनाने के बाद उसके ऊपर प्राकृतिक रंग से पेंटिंग को किया जाता है। उनको एक पेंटिंग को बनाने में कई बार एक महीने का समय लगता है तो कहीं बाद दो से तीन महीने भी लग जाते है। वह करीब 20 सालों से इस मेले में आ रहे है। उनकी पेंटिंग को लोग काफी पसंद करते है।
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