अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। किडनी कांड मामले में पंडित बीडी शर्मा विश्वविद्यालय रोहतक ने सेक्टर-16 स्थित मैरिंगो क्यूआरजी अस्पताल पर कार्रवाई करते हुए किडनी ट्रांसप्लांट का लाइसेंस होल्ड कर दिया है। इसके बाद अस्पताल अब कोई ट्रांसप्लांट नहीं कर पाएगा। यह कार्रवाई एक संस्था की अध्यक्ष की शिकायत पर की गई है।
दो माह पूर्व गांव सौंदहद पलवल निवासी रिंकी ने पुलिस को शिकायत दी थी कि दो साल पहले पति के फेसबुक अकाउंट पर किडनी दान करने की अपील का विज्ञापन देखा था। नासमझी में उन्होंने क्लिक कर दिया था। फोन पर राजा नाम के व्यक्ति ने रिंकी से संपर्क किया था। आरोपियों ने रिंकी को पति की सरकारी नौकरी लगाने का वायदा किया था। झांसे में आकर उन्होंने किडनी देने के लिए हां कर दी थी। रिंकी का आरोप है किडनी दिल्ली पश्चिम विहार के रहने वाले विनोद मंगोत्रा नाम के व्यक्ति को ट्रांसप्लांट की जानी थी। नियमानुसार परिवार का सदस्य ही किडनी दान कर सकता है। ऐसे में आरोपियों ने विनोद की पत्नी अंबिका के नाम से रिंकी का फर्जी आधार कार्ड और शादी पंजीकरण प्रमाणपत्र बनवाया था। सेक्टर-16 क्यूआरजी अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट हुई। पुलिस ने अस्पताल की कोर्डिनेटर स्वाति, किडनी विभाग प्रमुख डॉ. श्रीराम कांवरा के अलावा नई दिल्ली रमेश नगर के रहने वाले तेजेंद्र कुमार, जय प्रकाश के खिलाफ मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, धोखाधड़ी, फर्जी कागजात बनाने, जान से मारने आदि की धाराओं में मामला दर्ज किया गया। मामले के मुख्य आरोपी विनोद मंगोत्रा अभी जमानत पर है। वहीं 30 दिसंबर-2022 को पीजीआई रोहतक के चिकित्सा अधीक्षक की अगुआई में तीन सदसीय टीम मैरिंगो क्यूआरजी अस्पताल में हुए किडनी ट्रांसप्लांट मामले की जांच की थी। जांच के दौरान देखा गया कि ट्रांसप्लांट के समय क्यूआरजी अस्पताल ने किन दस्तावेजों के आधार पर ऑपरेशन किया। किन नियमों का पालन किया आदि। पीजीआई रोहतक ने क्यूआरजी अस्पताल को मामले की जांच तक किसी प्रकार की किडनी ट्रांसप्लांट पर रोक लगा दी है।