- श्रद्धालुओं के लिए मंगलवार को सुबह चार बजे से खुल जाएंगे मंदिरों के कपाट
संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। नवरात्र के लिए मंदिरों में सभी तैयारियां पूरी कर ली गईं। मंदिरों को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है। श्रद्धालुओं की भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए सुरक्षा कर्मियों के साथ स्वयंसेवक को तैनात किया गया है। इस दौरान नौ दिन मंदिरों में जागरण आयोजित किए जाएंगे। मंगलवार को पहले दिन घट स्थापना के बाद मां के शैलपुत्री स्वरूप का पूजन किया जाएगा।
नवरात्र के नौ दिनों में माता के नौ रूपों की पूजा करने का विशेष विधि विधान है। ऐसी मान्यता है कि इन दिनों में जप-पाठ, व्रत-अनुष्ठान, यज्ञ- दानादि शुभ कार्य करने से व्यक्ति को पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। नवरात्र पर्व को लेकर सभी देवी मंदिरों में तैयारियां पूरी हो गई है। नवदुर्गा पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह बना हुआ है। विशेषकर महिलाओं ने पर्व को लेकर तैयारियां पूर्ण कर ली है। माता के भक्तों के लिए शहर के मंदिरों को पूरी तरह से सजा दिया गया है। शहर के एनआईटी एक स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर, काली मंदिर, सेक्टर 7, 8 स्थित माता के मंदिरों को रंग बिरंगी रोशनी से सजाया गया है। नवरात्र पर सुबह 4 बजे से माता के द्वार खुल जाएंगे। यहां श्रद्धालुओं की सुरक्षा के भी पूरे इंतजाम किए गए हैं। तिकोना पार्क स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर और काली मंदिर में माता में माता के दर्शनों के लिए होने वाली भीड़ में किसी भी घटना से निपटने के लिए सुरक्षा कर्मियों की व्यवस्था की गई है। एनआईटी स्थित सिद्धपीठ श्री महाकाली मंदिर के प्रधान राकेश कुमार ने बताया कि नवरात्र के दिनों में भक्तों को दर्शन करने में कोई परेशानी नहीं होगी। मंदिर के कपाट भक्तों के लिए 24 घंटे खुले रहेंगे। हर दिन माता की चौकी का विशेष कार्यक्रम का आयोजित किया जाएगा। व्रतधारी भक्तों के लिए फलाहारी प्रसाद का वितरण किया जाएगा। तिकोना पार्क एनआईटी-1 नंबर स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर के प्रधान जगदीश भाटिया ने बताया कि नवरात्रों को लेकर तैयारी पूरी हो चुकी है। दर्शन करने के दौरान भक्तजनों को किसी प्रकार की कोई परेशानी न होए इसके लिए सेवादारों को ड्यूटी पर लगाया गया है।
इस मंदिर की सबसे ज्यादा मान्यता
गांव मोहना के जंगलों में बना मां कालका का मंदिर दूर-दूर तक मशहूर है। मंदिर में नवरात्र के मौके पर भक्तों का हुजूम उमड़ता है। गांव के लोग शुभ कार्य से पहले मां की पूजा जरूर करते हैं। मंदिर के संरक्षक राहुल ने बताया कि गांव में बना मां कालका का मंदिर काफी प्राचीन है। अज्ञातवास के दौरान पांडव जब इस इलाके से गुजरे तो यहां स्थित कालका मंदिर में मां की पूजा-अर्चना कर विजयी होने का आशीर्वाद मांगा था। मंदिर के प्राचीन होने का सबूत मंदिर के आसपास बने 4 विशालकाय खंभे हैं। यहां दिल्ली और यूपी के भक्तजन भी माता के दर्शन के लिए आते हैं।