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Faridabad News: तीन साल में 42 तारीखों के बाद न्याय, दो दोषियों को आजीवन कारावास

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सामूहिक दुष्कर्म-हत्या: डीएनए रिपोर्ट बनी सबसे ठोस सबूत, स्वाब से मैच हुआ दोषी का प्रोफाइल
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। मुजेसर थाना क्षेत्र में वर्ष 2023 में महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म और फिर उसकी गला दबाकर हत्या करने के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) पुरुषोत्तम कुमार की अदालत ने 11 अगस्त को सुनवाई करते हुए दोनों आरोपियों मुकेश उर्फ कालू (38) और प्रहलाद (20) को दोषी करार देकर अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोनों दोषियों पर 2.62 लाख-2.62 लाख का जुर्माना भी लगाया है।

अप्रैल 2023 में हुई इस वारदात में मृतका के भाई की शिकायत पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी। जघन्य अपराध होने के कारण पुलिस ने इसे चिन्हित अपराध (आइडेंटिफाइड क्राइम) की श्रेणी में रखा और जांच क्राइम ब्रांच डीएलएफ को सौंपी थी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 27 अप्रैल 2023 को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था और 29 जुलाई 2023 को अदालत में चालान पेश कर दिया था। इस मामले में करीब तीन साल सुनवाई चली। मामले की शुरुआत मुजेसर के सराय मोहल्ला स्थित किराये के मकान से हुई। पड़ोस में रहने वाला प्रहलाद महिला पर खराब नीयत रखता था और उसे परेशान करता था। 21 अप्रैल 2023 को जब पीड़ित महिला का पति और भाई अपने काम पर गए थे, तब प्रहलाद ने अपने साथी मुकेश के साथ शराब पी और घर में घुसकर आभूषण लूटने की योजना बनाई। दोनों ने महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और फिर भेद खुलने के डर से उसकी गला दबाकर हत्या कर दी।
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आत्महत्या साबित करने के लिए फंदे पर लटकाया शव
वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों दोषियों ने साक्ष्य मिटाने की साजिश रची। इसके बाद उन्होंने कमरे में रखी बेड की चादर से शव काे पंखे से लटका दिया ताकि मामला आत्महत्या का लगे और बाहर से ताला लगाकर भाग गए। रात 10:30 बजे जब पति घर लौटा तो ताला खोलकर देखा कि पत्नी फंदे से लटकी हुई थी। इसके अलावा दोषी जाते समय मृतका के दो मोबाइल फोन और घर की चाबियां भी चुरा ले गए थे, जिन्हें बाद में पुलिस ने कब्जे से बरामद किया। अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस और अभियोजन पक्ष की ओर से अभेद्य साक्ष्य श्रृंखला पेश की गई। पूरे मुकदमे के दौरान कुल 42 तारीखें लगीं, जिनमें 26 प्रकार के दस्तावेजी व भौतिक सबूत अदालत के समक्ष रखे गए। अधिवक्ता रविंदर गुप्ता ने बताया कि अभियोजन पक्ष की ओर से 25 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। पीड़िता के भाई, पति और मकान मालिक की गवाही ने आरोपियों के झूठ का पर्दाफाश किया। एससी एसटी एक्ट में भी दोषी करार दिया गया है।
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फॉरेंसिक और डीएनए जांच बनी सबसे बड़ी कड़ी
इस मामले में सबसे ठोस सबूत फॉरेंसिक लैब से मिली डीएनए रिपोर्ट बनी। मृतका के स्वाब से मिला सीमेन दोषी प्रहलाद के डीएनए प्रोफाइल से पूरी तरह मैच कर गया। इसके अलावा लूटे गए मोबाइल फोन की बरामदगी ने भी दोनों की मौजूदगी साबित कर दी। इसी फॉरेंसिक रिपोर्ट और अपराध की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने मार्च 2025 में प्रहलाद की जमानत याचिका भी खारिज कर दी थी।
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