सकारात्मकता के साथ जो भी काम करो, प्रकृति आपको मनोबल देगी। ये मानना है बल्लभगढ़ की एसडीएम अपराजिता का। अपराजिता ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) परीक्षा को तीसरे प्रयास में पास किया। मां बाप की इकलौती लाडली एक ओर अंतिम पड़ाव पार कर अधिकारी बनने के लिए जुटी हुई थीं कि मां का देहांत हो गया। तब अपराजिता इंटरव्यू फेज में थी।
मां के देहांत से वे टूट गईं। सामर्थ्य मानो खत्म हो गया, लेकिन यह परीक्षा वह समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए दे रही थीं। ऐसे में परिवार के लोगों सहित उनके पति ने उनके हौसलों को बढ़ाया। वे आगे बढ़ीं और अधिकारी बन गई।
मूलरूप से बनारस निवासी अपराजिता ने कृष्णा मूर्ति फाउंडेशन से स्नातक की शिक्षा ली। बीआईटी मेश्रा से केमिकल इंजीनियर की। यहीं से सीमेंट निर्माता कंपनी एसीसी में कैंपस प्लेमेंट के दौरान चयन हुआ। इस दौरान यूपी के टिकारिया प्लांट में काम करने वाली वह एकमात्र महिला थीं।
इस दौरान उन्होंने अपने बचपन के सपने को फिर से जीने का मन बनाया। नौकरी छोड़ आईएएस परीक्षा की तैयारी शुरू की। इतिहास विषय के साथ तैयारी शुरू की। चार माह कोचिंग ली। तीसरे प्रयास में परीक्षा पास कर ली। पहली पोस्टिंग फाइन आर्ट फाउंडेशन की सचिव के रूप में हुई।