अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। जिले में टीबी मरीजों को मिलने वाली आर्थिक सहायता में गड़बड़ी करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि तत्कालीन कर्मचारी ने एक खाते में तीस हजार रुपये एक साथ ट्रांसफर कर दिए। इसी प्रकार करीब 10-12 और मामले जांच में सामने आए हैं। पैसे की गड़बड़ी करने के मामले की जांच के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी समेत पांच सदस्यों की टीम बनाई है।
सरकार टीबी उन्मूलन को लेकर कार्य कर रही है। इसके लिए मरीजों को पहचान, दवा के साथ प्रतिमाह पांच सौ रुपये आर्थिक सहायता के रूप में भी मिलते हैं। विभाग के अनुसार टीबी मरीज की पहचान होने पर दवा बीके अस्पताल से उपलब्ध कराई जाती है। वहीं, मरीज के खाने-पानी के लिए डायरेक्ट टू बेनिफिट यानि डीबीटी के जरिए 500 रुपये लाभार्थियों को देने का प्रावधान है। सरकार मरीज को छह माह पैसे का भुगतान करती है। यदि मरीज ठीक नहीं हुआ तो आगे भी सहायता राशि दी जाती है। सूत्रों के अनुसार साल 2022 से अगस्त 2023 तक विभाग ने जांच में पाया कि एक खाते में करीब 30 हजार रुपये भेजे गए हैं। जब विभाग ने खाते की जांच की तो पता चला कि आरोपी विभाग का कर्मचारी ही है। इसके बाद विभाग ने पात्रों के अन्य खातों की जांच की। इसमें भी समान गड़बड़ी मिली। नियम के अनुसार रुपये सीधे मरीज के खाते में जाना चाहिए थे। आशंका है कि मरीज के बजाय दूसरे के खाते में जानबूझ कर रुपये भेजे गए। संबंधित अधिकारी ने पूरे मामले की जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विनय गुप्ता को दी। इस पर उन्होंने डिप्टी सीएमओ डॉ. राम भगत के नेतृत्व में एक टीम का गठन कर पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दिए। सीएमओ ने कहा कि पात्रों को सीधे खाते में पैसे देने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि कुछेक ऐसे मामले आए हैं,जहां पात्रों के खाते में सीधे पैसे नहीं गए हैं। सीएमओ ने कहा कि ऐसे मामलों की जांच चल रही है। गड़बड़ी करने वाले पर थाने में शिकायत दी गई है। दूसरी ओर इस मामले में गठित टीम ने पैसे भेजने की गड़बड़ी मामले में बैठक कर विभिन्न पहलुओं की जांच की।
जिले में 6000 टीबी मरीज
स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार फरीदाबाद में अभी तक 6000 टीवी मरीज हैं। इनमें एमडीआर के मरीज भी शामिल हैं। इन सभी मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से फ्री में दवाइयां मुहैया कराई जाती हैं। ऐसे मरीजों की पहचान के लिए लगातार कैंप भी लगाए जाते हैं। सरकार का प्रयास है कि ऐसे मरीजों की पहचान कर दवा के साथ आर्थिक मदद भी मिले। वहीं, 2800 मरीजों को कई लोगों ने गोद लिया हुआ है। ये लोग मरीजों को हर माह पौष्टिक आहार उपलब्ध कराते हैं।
सीएम फ्लाइंग की जांच में दवा कम मिली थी
6 अक्तूबर को मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने बीके नागरिक अस्पताल के टीबी केंद्र पर छापा मारा था। दस्ते को शिकायत मिली थी कि टीबी मरीजों को दवाएं समय पर नहीं मिलती हैं। टीम द्वारा मेडिसिन स्टोर में उपलब्ध दवाइयों का स्टॉक रजिस्टर से मिलान किया गया। मिलान करने पर टीबी मेडिसिन स्टोर में करीब 11 हजार गोलियां कम पाई गईं। इस दौरान पता चला कि प्रत्येक टीबी मरीज को मुफ्त दवाओं के अतिरिक्त 6 माह तक प्रतिमाह 500 की सहायता राशि भी दी जाती है। टीबी मरीजों को दी जाने वाली इस सहायता राशि के वितरण में भी धांधली की हुई है। लेखा शाखा से दो सालों में दी गई सहायता राशि का विवरण लिया था।