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32 के बाद मां बनने के चांस कम: इस वजह से बढ़ रहा बांझपन, महिला के पास बचने के दो उपाय; तीसरे के लिए समाज दोषी

Fri, 11 Oct 2024 06:40 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद

सार

महिलाओं में गर्भधारण न कर पाने की समस्या महिला और पुरुष दोनों की कमी के कारण होती है। इसका सबसे बड़ा कारण प्रदूषण, खराब जीवनशैली और खानपान होता है।
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महिलाओं में बढ़ रहा बांझपन - फोटो : शटर स्टोक
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विस्तार
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बढ़ते प्रदूषण, खराब जीवनशैली और खानपान के कारण महिलाओं में गर्भधारण करने की समस्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में महिलाएं मां बनने के लिए आईवीएफ का सहारा ले रही हैं। फरीदाबाद के ईएसआई और निजी अस्पताल में गर्भधारण न करने की समस्या को लेकर प्रतिदिन करीब 20 से 25 महिलाएं इलाज के लिए पहुंच रही हैं। ऐसे में महिलाओं के साथ साथ पुरुषों की भी जांच की जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार महिलाएं अनदेखी और लापरवाही के कारण ही गर्भाशय से संबंधित बीमारियों का शिकार हो रही हैं।

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महिलाओं में गर्भधारण न कर पाने की समस्या महिला और पुरुष दोनों की कमी के कारण होती है। इसका सबसे बड़ा कारण प्रदूषण, खराब जीवनशैली और खानपान होता है। इसके साथ ही यदि महिलाओं में किसी भी प्रकार का इंफेक्शन होना, ट्यूब ब्लॉक हो जाना, टीबी होना और अंडा बनने की प्रक्रिया ठीक से नहीं होने पर भी बांझपन की समस्या हो सकती है। महिलाओं में प्रदूषण का असर सीधे उनके अंडेदानी (ओवरीज) पर पड़ता है। वहीं, पुरुषों के शुक्राणुओं में भी अलग अलग तरह की कमी पाई जाती है। जिस कारण से महिलाएं मां नहीं बन सकती हैं। पुरुषों में प्रदूषण के कारण उसके शुक्राणु पर काफी असर पड़ता है।

आज के समय में महिलाएं मां बनने के लिए आईवीएफ तकनीकी का सहारा ले रही हैं। इस तकनीकी से अंडे और शुक्राणु को प्रयोगशाला में मिलाकर गर्भधारण किया जाता है। इसके लिए ईएसआईसी अस्पताल में तीन प्रकार से इलाज शुरू किया जाना है। इसमें इलाज के लिए आईयूआई, आईवीएफ और आईसीएसआई का इस्तेमाल किया जा सकेगा। - नीलिमा चौधरी, स्त्री रोग विशेषज्ञ, ईएसआईसी अस्पताल

महिलाओं की प्रजनन क्षमता 32 वर्ष के बाद कम होने लगती है। वहीं, उम्र बढ़ने के कारण गुणवत्ता और मात्रा कम हो जाती है। ऐसे में गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है और साथ ही बच्चे में जन्मजात विसंगतियां भी होती हैं। ऐसे में आईवीएफ की मदद से महिलाएं मां बनने का सुख प्राप्त कर सकती हैं। आईवीएफ एक प्रजनन तकनीक है, जिसमें अंडे और शुक्राणु को प्रयोगशाला में मिलाकर गर्भधारण किया जाता है। 

आईवीएफ पीरियड शुरू करने से लेकर गर्भावस्था टेस्ट के पॉजिटिव आने तक में करीब 6 हफ्ते का समय लग सकता है। इसके बाद भ्रूण कोख में विकास के हिसाब से गर्भावस्था का टाइम आगे बढ़ाया जाता है। इसके साथ ही 30 वर्ष से कम आयु की महिलाओं के लिए आईवीएफ की सफलता दर 60 प्रतिशत से अधिक है। वहीं, 35 वर्ष से अधिक की महिलाओं के लिए सफलता दर 50 प्रतिशत रह जाती है। -डॉ. अफशा खान, स्त्री रोग विशेषज्ञ, निजी अस्पताल
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आईवीएफ से पहले महिला व पुरुष को ध्यान रखने योग्य बातें
अधिक वजन और मोटापे के कारण महिलाओं में गर्भधारण करने की क्षमता कम हो सकती है और गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। आईवीएफ कराने वाली महिलाओं को वजन कम करना चाहिए। वजन घटाने से आईवीएफ परिणाम को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा आईवीएफ के सकारात्मक परिणाम के लिए महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु की गुणवत्ता और अंडे व शुक्राणु के मेल से बनने वाले भ्रूण की गुणवत्ता भी बहुत महत्वपूर्ण है। आईवीएफ प्रक्रिया सही तरह से करने के लिए खानपान का ध्यान रखना, धूम्रपान के सेवन से बचना, शराब के सेवन से बचना, समय से नींद लेना, व्यायाम करना, हरी सब्जियां का सेवन करने जैसी चीजों का ध्यान रखना चाहिए।
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