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Faridabad News: निर्दलीय बिगाड़ सकते हैं भाजपा और कांग्रेस का खेल

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तीन विधानसभा क्षेत्र प्रमुख राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों को टक्कर देते दिखाई देंगे निर्दलीय
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धनंजय चौहान

फरीदाबाद। विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस और भाजपा में टिकट बंटवारे के बाद राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। भाजपा और कांग्रेस के बागी नेताओं ने अपनी-अपनी पार्टियों के चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने का इरादा बनाया है। फरीदाबाद क्षेत्र में निर्दलीय प्रत्याशियों की बढ़ती सक्रियता से चुनावी माहौल में हलचल मच गई है। ऐसे में निर्दलीय उम्मीदवार प्रमुख राजनीतिक दलों के समीकरण बिगाड़ सकते हैं।

विधानसभा चुनाव के लिए 64 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए हैं। इनमें करीब 30 से अधिक उम्मीदवार निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें कई बड़े चेहरे भी शामिल हैं। ऐसे में बागी नेताओं ने राजनीतिक दलों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना कांग्रेस और भाजपा को करना पड़ा रहा है। कांग्रेस और भाजपा में अपनों की बगावत से समीकरण बदल सकता है। इस बार जहां कांग्रेस को उम्मीद है कि भाजपा को सत्ता से बाहर करने में वह कामयाब रहेगी। दूसरी ओर जिस तरह से टिकट बंटवारे के बाद भाजपा के नेता और कार्यकर्ता एक-एक कर पार्टी छोड़ते गए। उससे भाजपा की भी टेंशन बढ़ गई है। कुछ यही हाल कांग्रेस में देखने को मिल रहा है, जो की दोनों ही बड़े दलों के लिए अच्छे संकेत नहीं है।
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शारदा राठौर भी उतरी निर्दलीय

बल्लभगढ़ विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस की बागी नेता शारदा राठौर ने भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में किस्मत आजमाने का निर्णय लिया है। राठौर का निर्दलीय मैदान में उतरना कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है, क्योंकि उनकी पार्टी के भीतर की स्थिति को अस्थिर करने की उनकी क्षमता पर प्रश्न उठ रहे हैं। उनके नेतृत्व में कांग्रेस के पुराने समर्थक और कार्यकर्ता उन पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं, जिससे पार्टी को नुकसान हो सकता है।

नयनपाल रावत ने बढ़ाई भाजपा की टेंशन

पृथला विधानसभा सीट से भाजपा की टिकट के प्रमुख दावेदार माने जाने वाले नयनपाल रावत ने भाजपा से टिकट कटने के बाद निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया है। वे पूर्व में भी निर्दलीय चुनाव जीतकर विधायक बने थे। उसके बाद भाजपा सरकार को समर्थन दे दिया था। सरकार ने उन्हें हरियाणा वेयर हाउस के चेयरमैन की जिम्मेदारी सौंपी थी। ऐसे में वे भाजपा से टिकट की आस लगाए बैठे थे, लेकिन ऐन मौके पर पार्टी ने उनके स्थान पर भाजपा के टेकचंद शर्मा को टिकट दे दिया। जिससे भाजपा को इस सीट पर भीतरघात का सामना करना पड़ रहा है। निर्दलीय चुनाव लड़ने से सबसे अधिक भाजपा को नुकसान हो सकता है।



निर्दलीय दीपक डागर, भाजपा के वोट बैंक पर करेंगे चोट

पृथला विधानसभा क्षेत्र से बागी विधायक दीपक डागर ने निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरकर भाजपा की उम्मीदों को झटका दिया है। डागर की उम्मीदवारी भाजपा के वोट बैंक को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि वह एक अनुभवी और प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। उनकी निर्दलीय उपस्थिति भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है।

महत्वपूर्ण बदलाव ला सकते बागी
तिगांव से कांग्रेस के पूर्व विधायक ललित नागर ने भी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी अखाड़े में कदम रखा है। उनकी इस कदम से कांग्रेस के वोट बैंक को खतरा बढ़ गया है, वोट बैंक दोनों हिस्सों में बंट सकता है, जो पार्टी के चुनावी प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है। हालांकि पार्टी ने रातोंरात ललित का टिकट काट कर युवा चेहरा रोहित नागर पर भरोसा जताया है, जो युवा चेहरा होने के साथ लोगों के बीच गुर्जर बहुल क्षेत्र में अच्छी पैठ रखते हैं। वहीं भाजपा के मौजूदा विधायक राजेश नागर पूरी टक्कर में है। इन निर्दलीय प्रत्याशियों की उपस्थिति से स्पष्ट है कि चुनावी मैदान में भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं। ये बागी नेता न केवल अपनी-अपनी पार्टियों की चुनावी रणनीति को जटिल बना रहे हैं, बल्कि चुनावी परिदृश्य में भी महत्वपूर्ण बदलाव ला सकते हैं।
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बड़खल में पंजाबियों की नाराजगी पड़ सकती है भाजपा पर भारी

बड़खल सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में कोई बड़ा चेहरा तो चुनावी मैदान में नहीं है। लेकिन, भाजपा ने जिसे उम्मीदवार चुना है उसे लेकर विरोध के सुर तेज हो गए हैं। भाजपा उम्मीदवार धनेश अदलखा स्वयं अपनी पार्टी की भाजपा विधायक व शिक्षा मंत्री के विकास की कमियां गिनाने में लगे है। उनके कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इससे पार्टी के बड़े नेताओं के साथ कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ गई है।
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