पाइप लाइन से रामपुर, धतीर, हरचंदपुर और छांयसा रजवाहों तक पहुंचेगा
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। शहर में सीवर से निकलने वाले शोधित पानी का इस्तेमाल अब खेतों की सिंचाई के लिए किया जाएगा। फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) ने इसके लिए योजना तैयार की है। इसके तहत शहर के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में शोधित होने वाले पानी को पाइप लाइन के जरिये रामपुर, धतीर, हरचंदपुर और छांयसा रजवाहों तक पहुंचाया जाएगा। इन रजवाहों के माध्यम से 130 क्यूसेक पानी 50 से अधिक गांवों के खेतों की सिंचाई के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इससे सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ने के साथ यमुना नदी में शोधित पानी छोड़ने की मात्रा भी कम हो सकेगी।
अभी तक एसटीपी में शोधित होने वाले पानी को गौंछी ड्रेन के माध्यम से यमुना नदी में छोड़ा जा रहा था। अब इस पानी का इस्तेमाल कृषि कार्यों में करने की तैयारी है। एफएमडीए की योजना के तहत अलग-अलग एसटीपी से पानी लेकर संबंधित रजवाहों तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए रजवाहों में पाइप लाइन बिछाई जाएंगी। प्राधिकरण की योजना से शोधित पानी का उपयोग बढ़ाने और सिंचाई के लिए वैकल्पिक जलस्रोत विकसित करने में मदद मिलेगी।
एफएमडीए ने सिंचाई विभाग से मरम्मत कार्य का एस्टीमेट मांगा
योजना के तहत मिर्जापुर एसटीपी से रामपुर रजवाहे में 40 क्यूसेक शोधित पानी भेजा जाएगा। इसके लिए रामपुर रजवाहे की मरम्मत कराई जाएगी। एफएमडीए ने सिंचाई विभाग से मरम्मत कार्य का एस्टीमेट मांगा है। इसके अलावा पानी को नियंत्रित करने के लिए रिजर्वायर बनाने की भी योजना है। व्यवस्था ऐसी होगी कि जरूरत से अधिक पानी होने पर उसे गुरुग्राम नहर की ओर भेजा जा सके। वहीं, प्रतापगढ़ एसटीपी से 40 क्यूसेक पानी धतीर और हरचंदपुर रजवाहों में शोधित पानी पहुंचाया जाएगा। इसके लिए भी पाइप लाइन बिछाने की योजना है। इन दोनों रजवाहों के माध्यम से आसपास के गांवों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं, बादशाहपुर एसटीपी से छांयसा रजवाहे में 50 क्यूसेक पानी भेजने की योजना है। एफएमडीए सभी रजवाहों तक पानी पहुंचाने के लिए जरूरी ढांचा तैयार करेगा। गौरतलब है कि मिर्जापुर में 80 एमएलडी और 20 एमएलडी क्षमता के दो एसटीपी हैं। प्रतापगढ़ में 100 एमएलडी क्षमता का एसटीपी है। वहीं, बादशाहपुर में 45-45 एमएलडी क्षमता के दो और 30 एमएलडी क्षमता का एक एसटीपी संचालित है। इन संयंत्रों में शोधित होने वाले पानी का उपयोग सिंचाई के साथ ग्रीन बेल्ट की सिंचाई के लिए भी किया जाएगा।
सीवर के शोधित पानी का इस्तेमाल खेतों की सिंचाई के लिए किया जाएगा। इससे किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए सिंचाई विभाग से एस्टीमेट मांगा गया है। एस्टीमेट मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
- समुंद्र सिंह, कार्यकारी अभियंता, एफएमडीए