फरीदाबाद। खोरी गांव में पुलिस-प्रशासन द्वारा सर्वे का कार्य दूसरे दिन भी जारी रहा। पुलिस अधिकारियों ने घर-घर जाकर लोगों से उनके निवास संबंधी जानकारी मांगी। जमीन किस से खरीदी, कब खरीदी और आधार नंबर क्या है। परिवार में कितने सदस्य है। लेकिन स्थानीय लोगों ने पुलिस के सर्वे में शामिल होने से इनकार कर दिया। लोगों ने सर्वे करने वाली पुलिस टीम को अपने निवास संबंधी प्रमाण-पत्र दिखाने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उनके पास निवास के सभी प्रमाण पत्र फिर क्यों सर्वे में शामिल हों।
पुलिस-प्रशासन की ओर से खोरी गांव में सर्वे का काम शुरू किया गया है। इसका नेतृत्व एसीपी सुखबीर सिंह द्वारा किया जा रहा है। शुक्रवार को पुलिस टीम घर-घर जाकर लोगों का ब्यौरा जुटाती नजर आई। पुलिसकर्मियों ने लोगों से प्रपत्र भरवाया कि वे खोरी में कब से रह रहे हैं। आधार कार्ड नंबर, पहचान पत्र नंबर क्या है। मकान कितने गज में, कहां के मूल निवासी हैं। मकान किससे और कितनी राशि देकर खरीदा गया है। इस दौरान कुछ लोगों ने जानकारी दी, जबकि अधिकांश लोगों ने जानकारी देने से मना कर दिया।
चर्च वाली गली बिलाल मस्जिद, मदरसे के आसपास के क्षेत्र में पुलिस की टीमें पहुंचीं, तो लोगों ने सामने आने से किनारा कर लिया। एसीपी सुखबीर सिंह ने बताया कि खोरी क्षेत्र के हर निवासी का ब्यौरा जुटा रहे हैं। लोगों से सहयोग करने की अपील की गई है। वहीं स्थानीय लोगों में पुलिस प्रशासन के खिलाफ तनाव बरकरार है। लोगों ने कहा कि सरकार पुलिस के माध्यम से उनकी जानकारी लेकर उन्हें भूमाफिया से लड़वाना चाहती है, जिससे कि वह तोड़फोड़ की कार्रवाई आसानी से कर सके। ऐसा किसी भी कीमत पर संभव नहीं होगा। पुलिस के पास भूमाफिया की पूरी जानकारी हैं। पहले उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। उसके बाद लोगों से जानकारी लेने के लिए आए।
डर और खौफ में जी रहे खोरी के निवासी पुलिस की वर्दी से इतने भयभीत हैं कि अपनी जानकारी ठीक प्रकार से पुलिस के साथ साझा भी नहीं कर पा रहे हैं, जबकि पुलिस लोगों से जबरदस्ती जानकारी उगलवाने के लिए कई हथकंडे अपना रही है। इस जानकारी में व्यक्तिगत जानकारी, भूमि संबंधित जानकारी, भूमाफिया की जानकारी आदि शामिल हैं, लेकिन मजदूर की सामाजिक आर्थिक स्थिति के बारे में कोई भी सवाल-जवाब नहीं किया जा रहा है और न ही उनके परिवार संबंधित कोई जानकारी नहीं ली जा रही है। मजदूर आवास संघर्ष समिति की ओर से यूनाइटेड नेशन रिपोटेरियर, चेयरपर्सन राज गोपाल बालाकृष्णन को एक ज्ञापन सौंपा गया। यूनाइटेड नेशन की ओर से मजदूर आवास संघर्ष समिति को मौखिक आश्वासन मिला है की अतिशीघ्र ही भारत सरकार को यूनाइटेड नेशन की ओर से पत्र लिखा जायेगा एवं खोरी गांव में वर्चुअल विजिट की जाएगी।
परिवार पहचान पत्र वालों को मिलेगा 5 हजार रुपये किराया
गांव वासियों को जब तक डबुआ कॉलोनी में बने फ्लैट नहीं मिल जाते, तब तक सरकार उन्हें दूसरी जगह कमरा किराए पर लेने के लिए करीब पांच हजार रुपये किराये के रूप में देने पर विचार कर रही है। नगर निगम के एक उच्च अधिकारी ने बताया कि इस विषय में मंत्रालय स्तर पर बात चल रही है। प्रदेश सरकार जल्द इसकी घोषणा कर सकती है। यदि ऐसा होता है तो खोरी वासियों को काफी राहत मिलेगी।
नगर निगम अधिकारी ने बताया कि डबुआ कॉलोनी में गरीब तबके लिए बने करीब 1400 फ्लैटों की हालत काफी खस्ता है। इन्हें मरम्मत करवाने की जरूरत है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने ये फ्लैट खोरी वासियों को देने की घोषणा की है। वहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर खोरी में जल्द तोड़फोड़ की जानी है। ऐसे में परिवार पहचान पत्र वाले बेघर होने वाले लोगों को जब तक फ्लैट नहीं मिल जाते तब तक किराये स्वरूप सरकार द्वारा पांच हजार रुपये देने की बात कही जा रही है। क्योंकि डबुआ में खस्ताहाल फ्लैटों की मरम्मत में करीब पांच से छह माह का समय लगने का अनुमान लगाया गया है।