फरीदाबाद (संजय शिशौदिया)। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से बचने के लिए रोग प्रतिरोधक दवाओं का बाजार तेजी पर है। पिछले आठ महीनों में इन दवाओं की मांग काफी बढ़ गई है। इसी के तहत अकेले फरीदाबाद जिले ने देश ही नहीं बल्कि विदेश के लोगों को भी करोड़ों रुपये की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं का सेवन कराया है। इनमें इंडोनेशिया, युगांडा, ईरान, कजाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका समेत कई देश शामिल हैं।
एलोपैथी के साथ आयुर्वेदिक भी शामिल
ब्राउन लेबोरेटरी लिमिटेड नामक दवा कंपनी के महाप्रबंधक आरपी हंस ने बताया कि फरीदाबाद में बनी दवाएं इंडोनेशिया, ईरान, कजकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, वियतनाम, इराक, इथोपेसिया, ताशकंद, टोरंटो आदि देशों में भेजी जाती है। कोरोना संक्रमण काल के दौरान इन सभी देशों में भी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं की मांग तेजी से बढ़ी है। इनमें एलोपैथी और आयुर्वेद दोनों तरह की दवाएं शामिल हैं। मुख्य रूप से इनमें विटामिन सी, मल्टीविटामिन, च्यवनप्राश, विंकोविट और लिमसी आदि की बिक्री बीते आठ माह के दौरान जमकर हुई है। जबकि एंटीबायोटिक एजेथ्रोमाइसिन एमोक्सलीन, सिप्लॉसिन और क्लेरीक्लो आदि दवाइयों की मांग कम हो गई है। अस्थमा को छोड़ दें तो श्वसन तंत्र के इलाज में काम आने वाली दवाओं के साथ दर्द निवारक दवाओं की मांग भी घटी है। दूसरी तरफ डायबिटीज, ब्लडप्रेशर और हार्ट के उपचार की दवाओं की मांग बढ़ी है। जो दवाइयां मरीजों को रोजाना क्रॉनिक केटेगरी में लेनी पड़ती हैं, केवल उनकी ही बिक्री बढ़ी है।
एंटीबायोटिक की घटी मांग
साइकोट्रॉपिक्स इंडिया लिमिटेड दवा कंपनी के चेयरमैन नवदीप चावला ने बताया कि कोरोना संक्रमण काल में लोग बीमारियों से बचाव के लिए अपनी इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) को मजबूत करने में लग गए। सेहत और स्वास्थ्य को लेकर जागरूक भी हुए हैं। उनका कहना है कि आठ माह पहले और अब के जीवन में जमीन आसमान का अंतर हो गया है। पहले जहां लोग एक दूसरे से गले मिलकर हालचाल पूछते थे, वहीं अब दो गज दूर रहकर सामाजिक दूरी के नियम को अपनाने लगे हैं। संक्रमण के खौफ को देखते हुए बाहर की चीजों का सेवन भी काफी कम हो गया है। इससे पेट से जुड़ी समस्याएं भी कम हुई हैं। ऐसे में मुख्य दवाओं के साथ दी जाने वाली एंटीबायोटिक भी कम बिकती है। इसके अलावा लोग इम्युनिटी बूस्टर ले रहे हैं तो सर्दी-खांसी-जुकाम में आयुर्वेदिक दवाओं या घर की रसोई में रखे मसालों का इस्तेमाल करना बेहतर मान रहे हैं। इस वजह से कफ सिरप भी कम खरीदे जा रहे हैं।
लोग पहले से ज्यादा जागरूक
एंटीबायोटिक की जगह लोग इम्युनिटी पावर बढ़ाने वाली दवा खरीद रहे हैं जिससे वह संक्रमित बीमारियों से बचे रहें। पहले से ज्यादा जागरूकता आई है। एंटीबायोटिक दवाओं की बिक्री में 35 प्रतिशत तक की कमी आई है। इनमें मिनरल्स और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल दवाइयां शामिल है।
- सौरभ गर्ग, फरीदाबाद केमिस्ट स्टोर, नीलम चौक
मल्टी विटामिन ज्यादा खरीद रहे लोेग
कोरोना संक्रमण काल में एंटीबायोटिक दवाइयों की बिक्री में गिरावट आई है, जबकि इम्युनिटी बढ़ाने वाली विटामिन्स व मल्टी विटामिन दवाइयों की बिक्री में दोगुना इजाफा हुआ है। गाइनेकोलॉजिकल की बिक्री में करीब 20 फीसदी और चर्म रोग के उपचार से जुड़ी औषधियों की बिक्री में 25 फीसदी तक की कमी हुई है।
- चंद्रप्रकाश बाटला, महासचिव-जिला फरीदाबाद दवा विक्रेता संघ
मौजूदा हालात
रोग प्रतिरोधक दवाओं का कारोबार 11 करोड़
एंटीबायोटिक दवाओं का कारोबार 1.5 करोड़
- फरीदाबाद में रजिस्टर्ड केमिस्टों की संख्या - 1300
- जिले में प्रतिमाह दवा कारोबार- करीब 25 करोड़ प्रतिमाह