परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद कब्जों को हटाना साबित हो सकता है बड़ी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। तीन दशक से लंबित फरीदाबाद-नोएडा-गाजियाबाद (एफएनजी) एक्सप्रेसवे परियोजना के सामने अब अवैध कॉलोनियां बड़ी बाधा बनकर उभर रही हैं। प्रस्तावित मार्ग के दोनों अलाइनमेंट पर पिछले पांच से सात वर्षों में 10 से अधिक अवैध कॉलोनियां बस चुकी हैं। ऐसे में परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद इन कब्जों को हटाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
लोक निर्माण विभाग ने परियोजना के दो अलाइनमेंट करीब दो साल पहले सरकार को मंजूरी के लिए भेजे थे। प्रस्ताव के अनुसार, लालपुर गांव के पास यमुना पर 600 मीटर लंबा पुल बनाया जाना है। सेक्टर-87 स्थित निजी अस्पताल के पास से रिवाजपुर और टिकावली होते हुए पुल तक नौ किलोमीटर लंबी सड़क प्रस्तावित है। एक अन्य मार्ग को मंझावली रोड से जोड़ा जाएगा।
पीडब्ल्यूडी के सर्वेक्षण में प्रस्तावित मार्ग पर कई ढाबे, अस्थायी दुकानें और पक्के मकान मिलने की बात सामने आई है। विभाग का कहना है कि सरकार से मंजूरी मिलने के बाद जमीन की पैमाइश, अधिग्रहण और अवैध कब्जों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। प्रभावित लोगों को नियमानुसार मुआवजा भी दिया जाएगा। परियोजना पूरी होने पर फरीदाबाद, नोएडा और गाजियाबाद के बीच की दूरी मिनटों में सिमट जाएगी।
गौरतलब है कि रोजाना करीब एक लाख लोग नौकरी और अन्य कार्यों के लिए नोएडा और गाजियाबाद आते-जाते हैं। यमुना नदी के कारण दोनों शहरों के बीच सीधा सड़क संपर्क नहीं है। लोगों को कालिंदी कुंज होकर जाना पड़ता है, जहां दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। 10 मिनट का सफर कई बार एक घंटे से अधिक में पूरा होता है, जबकि मेट्रो से यात्रा में करीब दो घंटे लग जाते हैं।